उस दिन अख़बार में न्यूस पढ़ी कि विश्विद्यालयों में स्तरीय शोध नहीं हो रहे हैं तो गुस्साई इल्ली से रहा नहीं गया और सीधी विश्वविद्यालय के प्रवक्ता से जा भिड़ी |
इल्ली: सर !भारत में शादी की उम्र क्या है ?
प्रवक्ता ने चश्मे के भीतर से देखा और बोले :१८-२० साल |क्यों ?
इल्ली:और शोध पूरा करने की ?
प्रवक्ता: लगभग २८ साल
इल्ली:और माफ़ कीजिये आपसे तो क्या पूछूंगी ,खुद ही समझ लें |समझदार को इशारा काफी |हिंदी फिल्मों को देख-देखकर १० साल की उम्र से ही बच्चे कुछ-कुछ समझने लगते हैं |
प्रवक्ता :तो !आप कहना क्या चाहती हैं ?
इल्ली:यही कि क्या आप समझते भी हैं कि २० साल का रास्ता क्या कुछ-कुछ में ही कटेगा |
प्रवक्ता:क्या मतलब?
इल्ली:मतलब ये कि जिनका केरेक्टर ढीला है उनकी तो कोई बात नहीं मगर केरेक्टर वाले लोगों को तो करीयर ,शादी ,पढाई ,नौकरी सभी को बेलेंस करना है |
प्रवक्ता: ह्म्म्म......तो
इल्ली :तो क्या सर! व्यवस्थापकों को कुछ तो सोचना चाहिए |
प्रवक्ता:क्या सोचना चाहिए ?यही कि प्रत्येक शोधार्थी को सरकारी खर्च पर सपरिवार विश्विद्यालय में आमन्त्रित करके उसके रहने-खाने का इंतजाम करे और कह दे कि लगे रहो भय्ये !जब तक तुम्हारी अगली पीढ़ी शोध के लिए तैयार नहीं हो जाती !
इल्ली:(लाजवाब हो कर )नहीं सर!
प्रवक्ता : और यह भी कि शोध का क्या है |कौन पढता है ?आप आराम से मजे लीजिये |
इल्ली:नहीं सर !
प्रवक्ता:आप लोगों ने विश्वविद्यालय को सराय समझ लिया है कि जिसका मन आता है मुह उठा का चला आता है |
इल्ली :नहीं सर! (इल्ली रुआंसी हो गयी )
प्रवक्ता:(नरम पड़ कर) जाइये मेडम अपना घर संभालिये |यह सब आपके बस कि बात नहीं है |
इल्ली:हम्म.... यह सब तो में भी समझती हूँ मगर सर! करीयर ,शादी ,पढाई ,नौकरी के बाद जो जिन्दगी बचेगी उसमें से ऐसा क्या होगा जो हम अपने बच्चों को दे कर जाएंगे |
प्रवक्ता लाजवाब थे |