आजकल धूप तेज चमकीली है ।गर्म कम है ।
सोमवार, 31 जुलाई 2023
मंगलवार, 25 जुलाई 2023
प्रसंगवश एक अवांतर चर्चा-
प्रिय पाठक! इन पंक्तियों की लेखिका ने जैन आगमों का अध्ययन किया है इसलिए अपनी समझ के आधार पर मैं श्रद्धालु और अ-श्रद्धालू के द्वैत पर विचार प्रस्तुत कर रही हूं ।
यह दर्शनशास्त्र की बहुत शक्तिशाली और पेचीदा पहेली है ।
मै कभी इस प्रश्न के बारे मे अवेयर नही थी।
पहले पहल मैने यह चर्चा मजूमदार की किताब मे पढ़ी थी ।शाहजहां के पुत्र दारा शिकोह संतो के साथ सोहबत मे इस बात की बौद्धिक पडताल कर रहे हैं।
इस्लामी दर्शन एकेश्वरवाद को मानता है । अल्लाह एक है और उसी ने सबको बनाया है तो फिर प्रश्न उठता है काफिर (अ-श्रद्धालू) को किसने बनाया ?
इस प्रश्न से शुरू होकर आगे एक कठोर बौद्धिक प्रक्रिया बताई गई है , जिसका अन्ततः यह निष्कर्ष निकलता है -
सच्चा विश्वासी वह अविश्वासी है जो ईश्वर को प्राप्त हो गया है ।जिसने उसका दर्शन प्राप्त कर लिया है , जिसे उसका ज्ञान है।
अविश्वासी वह है जो विश्वासी ( ईमानदार)है जो ईश्वर को प्राप्त नही है ।जिसने उसका दर्शन प्राप्त नही किया है , जिसे उसका ज्ञान नही है।
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जैन आगम मे यह पहेली कैसे सुलझाई गई है , इसकी बानगी देखिए। जैन दर्शन का आधार है- आत्मा की स्वतन्त्रता ।
आचारांग के पहले श्रुतस्कंध के पांचवें अध्ययन 'लोकसार' के पाँचवे उद्देशक में कुछ सूत्र आए हैं, जिन्हे हम इस पहेली के निष्कर्ष मान सकते हैं ।मूल भाषा प्राकृत है । उनकी हिन्दी इस प्रकार है ।
4 - श्रद्धालुओं में सम्यक अनुज्ञा में सम्प्रवर्जित -
सम्यक मानते हुए एकदा सम्यक होता है ।
असम्यक मानते हुए एकदा असम्यक होता है ।
असम्यक मानते हुए एकदा सम्यक होता है।
सम्यक मानते हुए एकदा असम्यक होता है।
5- सम्यक मानने वाले को सम्यक अथवा असम्यक अथवा सम्यक होती है उत्प्रेक्षा
6 -असम्यक मानने वाले को सम्यक अथवा असम्यक अथवा असम्यक होती है उत्प्रेक्षा
पाठक इस चर्चा से क्या निष्कर्ष निकालेंगे , यह मै उन पर छोड़ती हूं ।
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यह विषय मुझे प्रिय है इसलिए मैने थोड़ा-बहुत लिख दिया अन्यथा मौन रहना सर्वोत्तम सुखद है ।
सोमवार, 24 जुलाई 2023
राहुल गांधी जी के वीडिओ-6
स्मृति के आधार पर-
राहुल गांधी जी का वैष्णो देवी की यात्रा का वीडियो देखा था। बहुत साल पहले की बात है ।इस वीडियो में रास्ते में एक हिंदू श्रद्धालु की बातचीत दिखाई गई है, इसमें वह आदमी कह रहा है- वैष्णो देवी माता ने बुलाया है राहुल जी को दर्शन करने के लिए।इसलिए वे जा रहे हैं । नहीं बुलाया होता तो नहीं जा सकते थे ।
जो लोग भी वैष्णो देवी माता की दर्शन करने जाते हैं उनमें यह एक सामान्य विश्वास है ।हम भी तीन बार गए हैं।
अच्छा! श्रद्धालु इस विश्वास से जुड़ी कहानियां नहीं बताना भूलते। जब हम गए थे ।एक व्यक्ति ने हमें यह बताया था कि एक डेढ़ सौ किलो का आदमी पैदल चला गया उसे कुछ नहीं हुआ- क्योंकि माता ने उसे बुलाया था ।
और एक पतला सींक सा आदमी जिद कर रहा था मैं जरूर जाऊंगा रास्ते में ही हार्ट अटैक हो गया । इसलिए वापिस उतारना पड़ा - क्योंकि माता ने नहीं बुलाया था।
हम उनकी बातें सुनते रहे ।हमारे पास इन बातों की पुष्टि का उपाय था ?
कुछ बातें किन वजहों से याद रह जाती हैं कोई नहीं जानता। यह वीडियो मुझे उस श्रद्धालु की मासूमियत की वजह से याद रहा।
ओह ! ये श्रद्धालु कितने मासूम होते हैं -मेरे मन ने कहा ।
और कितने वल्नरेबल भी-मेरी बुद्धि ने कहा ।
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रविवार, 23 जुलाई 2023
शुक्रवार, 21 जुलाई 2023
बुधवार, 19 जुलाई 2023
शुक्रवार, 14 जुलाई 2023
एक बार एक बुद्धिजीवी के मुख से मैंने यह कहते सुना था के दलितो के दूल्हे को घोड़ी पर नहीं चढ़ने दिया जाता, इस बात से वे बहुत शर्मिंदा महसूस करते हैं। मुझे यह बात बहुत अद्भुत लगी थी ।कोई किसी और के कार्य से कैसे शर्मिंदा हो सकता है।
फिर मैं सोचने लगी कि ऐसे कौन से कार्य है जिन पर मुझे शर्मिंदगी महसूस हुई है । तो पहला मेरे को ध्यान आया कि शादी-ब्याह मे घरेलू महिलाएं जिन्हे प्रॉपर्ली नाचना नहीं आता, वे उत्साह में टेडी मेढी उटपटांग तरीके से नाचती है तो यह बात मुझे बहुत शर्मनाक लगती थी ।
एक और दूसरी बात। स्कूल मे झंडा फहराते हुए अगर झंडा ना खुले तो यह बात भी बहुत शर्मनाक लगती थी। मेरा कोई लेनादेना नही ।मै डायरेक्टली रिस्पॉन्सिबल नही ।फिर भी पता नही क्यों ,यह बात मुझे बहुत शर्मनाक लगती थी।खैर
फिर मैंने शास्त्रों में बिल्कुल अनोखी अद्भुत बात पढी । की दुनिया मे जो इतनी हिंसा होती है ,आचार्य भगवंत महापुरुष इससे शर्मिंदा महसूस करते हैं। यह बात बहुत ही अद्भुत थी मेरे लिए। अभी मै बहुत दूर हूं यहां तक पहुंचने के लिए।
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वैसे अब तो मै बहुत पार हो गई हूं इन बातों से । बेकार का लोड लेना बंद कर रखा है । अब मैक्सिमम ध्यान खुद के सुधार पर है।
सोमवार, 10 जुलाई 2023
बुधवार, 5 जुलाई 2023
मेरा प्रेजेंट स्टेटस ये चल रहा है कि जिन्हे भरोसा है उन्हे लेकर शुरू कर लेंगे , बाकी नेक्स्ट मे ज्वाइन कर लें । जैसे भी उनकी समझ बने ।
वैसे यह बात वाकई मे आश्चर्यजनक है कि इतने सालो मे किसी ने एक पोस्ट लाइक तक नही की ।may be I do not belong to your world.
ऐसी गहरे आश्चर्यों को सिर्फ कर्म सिद्धांत से समझा जा सकता है ।
खैर
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अगर ये नही भी होगा तो भी मेरे मन मे किसी के प्रति कोई गिला नही है ।
जब मै यहाँ आई थी तो आधी भगतनी तो पहले ही थी । आप से जुड़ कर मेरी भी भाव शुद्धि हुई है । मुझे महावीर वाणी पर और अधिक गहरा विश्वास हो गया है ।
एक ऐसे जमाने मे जब मनुष्य ही मनुष्य को खाने पे तुला है वहाँ पर छ जीवनिकाय की अहिंसा की बात कहना मजाक नही तो क्या है । पर मै बताऊं आपको! यह कतई भी मजाक नही है ।यह एक ज्ञान है ,जहाँ तक हम गुरु कृपा से पहुँचते हैं ।