सोमवार, 29 अप्रैल 2024

इस बार कांग्रेस की एडवर्टाइजमेंट्स कैम्पेन रचनात्मक है । मजा आता है देखके । 

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रविवार, 28 अप्रैल 2024


 Sew sister's daughter frock. 

पहले मैं सिलाई में कुशल हो जाऊं , मेरे लिए तो इतना ही बहुत है ।😊

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मंगलवार, 23 अप्रैल 2024

 श्रद्धा प्राप्त होने मे स्त्रियां अदभुत भाग्यशाली होती हैं । 😊

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रविवार, 21 अप्रैल 2024

शनिवार, 20 अप्रैल 2024

कैसी सुखद आश्चर्य की बात है ना कि जो बातें सब खुले में कहीं जा रही है, सबके सामने कही जा रही है, फिर भी उनमें से कुछ बातों का अर्थ कुछ ही लोग समझ पाते है।

 विकास दिव्यकीर्ति ने जब अपने इंटरव्यू में कहा की यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्हें पढ़ने का सुख प्राप्त हुआ, तो यह बात मैं किस तरह लगभग- लगभग समझ गई।

एम ए -फाइनल ईयर की पढ़ाई के दौरान मैंने भी वैसा ही पढ़ने का  असली मजा हासिल किया था। मैने बच्चों को भी कह रखा है कि अगर वे पढ़ने का मजा हासिल करना चाहते हैं तो उन्हें कम से कम एमए तक की शिक्षा जरूर हासिल करनी चाहिए।

पढ़ने का मजा अर्थात परीक्षा की टेंशन से मुक्ति पाना। कैसे? टीचरों के अनुशासन और स्कूल की नियमित दिनचर्या के शासन से अलग, पहले ही दिमाग में एक क्लियर पिक्चर होना-

 सिलेबस की

 किताबों की

 संभावित प्रश्नों की - यहाँ संभावित प्रश्नों से आशय नहीं कि  कुंजी स्टाइल में गिने-  चुने प्रश्नों को याद करना। इस बात से आशय ये है कि जब आप सिलेबस को पूरे मन से पढ़ कर तैयार करते हैं, तब आपको ये आइडिया अपने आप ही लग जाता की इस सिलेबस में से कौन कौन से प्रश्न बन सकते हैं। तब परीक्षा में ' कौन से प्रश्न कहीं से भी पूछ लिया जाएगा'  का भूत  अपने आप दिमाग से उतर जाता है ।

अपनी निजी अनुभव से प्राप्त इन महत्वपूर्ण बातों को , बाद में मैंने अपनी टीचिंग में भी शामिल किया था। अपने बच्चो को भी सिखाया। और धार्मिक शिक्षा शिविर में भी मैंने इन बातों का एप्लाई किया था।

आप कहोगे की क्या पहले जितनी भी शिक्षा प्राप्त की वहाँ क्या सिलेबस या किताबों का भी पता नहीं होता था? इतने मूर्ख थे क्या ?

 तो यहाँ बात ना- पता होने की नहीं है, बल्कि बात है इन चीजों को कंट्रोल में लेने की। 

पहले भी सारी बाते पता होती थी। लेकिन बहुत फर्क होता है रिक्शा में पीछे बैठ के चलना और रिक्शा में आगे बैठ कर चलने में । और ये फर्क ही होता है जब शिक्षा आपके लिए एक बोझ है ,  एक मजबूरी है। या फिर वह आनंद है। 

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यहाँ तक बात हुई पढ़ने के विलक्षण आनंद की , जिसका स्वरूप केवल भोक्ता ही जानता है।

अब आगे बात करते हैं प्रकट और प्रकटीकरण की ।

पढ़ने का विलक्षण आनंद आपके भीतर प्रकट हुआ यह एक निजी बात है। बट दुनिया में इसका प्रकटीकरण किन तरीकों में होता है।

 विकास दिव्यकीर्ति के संदर्भ में देखें, तो हम ये देखते हैं की वे कोई इस आनंद में विभोर होकर गीत नहीं गा रहे है , न ही वे इसका बखान करते फिर रहे हैं। उनके भीतर यह आनंद प्रकट हुआ और उन्होंने इसे अपने हृदय में ही छुपाकर रख लिया। फिर वह पढ़ाने के क्रम में उनकी उद्यमशीलता में प्रकट हुआ।

अपने संदर्भ में मैं ये कह सकती हूँ कि यह आनंद जैन शास्त्र पढ़नेे की तीव्र इच्छा के रूप में प्रकट हुआ।

आधुनिकता विषय पर सुधीश पचौरी का एक विस्तृत लेख है जिसमे वह शहर में हो रही एक गोष्ठी में एजाज़* का वक्तव्य सुनने के लिए लालयित  हैं । और इसके मुख्य बिंदुओं को और अपनी आलोचना को उन्होंने उस लेख में समेटा है। अगर मैंने सही पहचाना है तो यह आनंद वही है। बट इनमें यह एक विकट बौद्धिक श्रमशील क्षमता के रूप में प्रकट हुआ है।

अगर मैं गलत नहीं हूँ तो सुशोभित में  यह सोवियत पुस्तकों के अध्ययन के रूप में प्रकट हुआ है। और

 मनीष सिंह में यह इतिहास के अध्ययन में प्रकट हुआ है। लेकिन उनमें इस आनंद का स्वरूप 'आनंदमय'  नहीं है । पाठक उनकी पोस्ट बढ़कर इतिहास पढ़ने के आनंद से परिचित नहीं होता बल्कि उनकी प्रतिभा जितनी डाईसेक्टिंग मैनर में इतिहास पुरुषों की चीर फाड़ करती है तो वह  कमजोर जिगर वालों के लिए तो खासा धक्का लगाने वाला होता है ।

व्यक्तित्व,  क्षमता , परिस्थिति में यह अलग-अलग ढंग से दिखता है ।

हैरान हूं  ।


*स्मृति के आधार पर 

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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2024

 समवसरण


क्रियावादी = जीव अजीव पाप पुण्य आस्रव संवर बन्ध निर्जरा तप मोक्ष = 9 ×2 स्व-पर = 18×10 नित्य -अनित्य अर्थात काल, नियति ,ईश्वर, स्वभाव, आत्मा = 5×2 =10 । 18×10=180


 अक्रियावादी 


जीव अजीव आस्रव संवर बन्ध निर्जरा तप मोक्ष = 7 ×2 स्व-पर = 14×12 नित्य -अनित्य अर्थात काल, + यदृच्छा , नियति ,ईश्वर, स्वभाव, आत्मा = 6×2 =12 । 14×12= 84


 अज्ञानवादी 


9 ×7 =63 

7=सद असत सदसत अवक्तव्य सद् -अवक्तव्य असद- अवक्तव्य, सद-असद-अवक्तव्य


विनयवादी

देव ,राजा ,यति ,ज्ञाति ,स्थविर ,अधम ,माता पिता =8 ×4 मन,वचन,काय,दान = 36

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जैन दर्शन में ये चार तरह के दार्शनिक बताए गए हैं । 

-सुशोभित की पोस्ट पढ़कर 


 One of favorite videos of bjy.

https://www.facebook.com/share/r/Vkm9Ldn4mCWeTb49/?mibextid=oFDknk

गुरुवार, 18 अप्रैल 2024

विकास दिव्यकीर्ति के इंटरव्यू में उन्होंने 'इंग्लिश कैसे सीखी' इस बारे में बताया है। कि ' वह गया'  को इंग्लिश में बताने के लिए सेकंड फॉर्म ऑफ वर्ब लगाने हैं। 10 साल की स्कूली शिक्षा में उन्हें अभी तक यह बात समझ नहीं आई। जब समझ में आयी, तब इंग्लिश भी  समझ में आ गई।

कुछ इसी तरह की कहानी मेरी भी है। हमें नाइन्थ - टेंथ क्लास में जिस टीचर ने इंग्लिश सिखाई , उन्होंने 2 साल में ही सारी इंग्लिश ग्रामर क्लियर कर दी ।

 इंग्लिश में मेरी बारहवीं क्लास में डिस्टिंक्शन है।

 बीए पास कोर्स में इंग्लिश कोर्स तो सभी पढ़ते है। एक्स्ट्रा सब्जेक्ट में मेरे पास इंग्लिश इलेक्टिव भी था। यह कोर्स ऑनर्स से एक डिग्री कम माना जाता है । इसमें थर्ड ईयर में सेक्शन में फर्स्ट आने पर मुझे इनाम भी मिला है।

 बाद में मैंने एम ए  में हिंदी ली थी। और उसके बाद कॉन्शियसली मैंने हिंदी का प्रयोग ज्यादा करना शुरू कर दिया। हिंदी में ही मुझे मज़ा आने लगा था। 

भाषा अभ्यास की बात होती है ।

इससे रिलेटेड मैंने एक कहानी लिखी थी 'इंग्लिश के जिंदल सर' । वह छपने के लिए भेजी तो संपादक ने इस टिप्पणी के साथ छापने से इनकार कर दिया कि हम स्टूडेंट्स को मारने वाले शिक्षकों को  प्रोत्साहित नहीं कर सकते । 

खैर । इस बात पर तो मुझे कुछ नहीं कहना । सब की अपनी संपादकीय नीति होती है। वे अपनी योजना के तहत क्या छापे,क्या नहीं  , यह तो उनका अधिकार है। 

 यह इंग्लिश को सीखने के प्रोसीजर्स  की कहानी थी। हमारे देश में आज भी ऐसे बहुत से छात्र हैं जिनके लिए इंग्लिश सीखना एक चुनौती है । तो उन बच्चों तक ऐसी कहानियाँ पहुंचे तो उन्हें अवश्य कॉन्फिडेंस प्राप्त होगा कि इंग्लिश सीखना कोई पहाड़ चढ़ने जैसा मुश्किल कार्य नहीं है ।

इस मंशा को साथ ही मैंने यह कहानी लिखी थी।यह उस अद्भुत टीचर के प्रति मेरी ट्रिब्यूट भी थी । इस कहानी का बहुत बड़ा हिस्सा टीचिंग के क्षेत्र में प्रयोग को लेकर है। 

#how things come out 😊

#how when whole world wants you to feel low , u meet ppl who are doing their job silently , without expecting any reward or words of thanks. 😊


बुधवार, 17 अप्रैल 2024

इतने सालों में एक बात मैने ऑब्जर्व की है कि इन्डियन वोटर को राज्य और देश के चुनाव का अंतर तो मालूम है ।

#indian democracy 

रविवार, 14 अप्रैल 2024

 नार्मल बातचीत मे कोई मरने की बात कह दे तो हम तमककर कह देते हैं , मरे मेरे दुश्मन ।

बट जुकाम - खांसी ऐसी बला है , इंसान प्रार्थना करता है -भगवान!दुश्मनों को भी न हो ।

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हम भी पीछे से गन्नौर के हैं । कल विकास दिव्यकीर्ति का इंटरव्यू देखा ।

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बुधवार, 10 अप्रैल 2024


Sew pant today. First piece try on rough cloth.

2 hrs + 1/2 hrs cutting.

Hobby thing . Keeps me active .

Many more to come . Hope so . 😊

रविवार, 7 अप्रैल 2024

One shd take research on the creativity level of political campaigns in india . Really .😂

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मेरी रूचि धर्म और दर्शन मे ज्यादा है ।
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पिछला वादा रवीश सर के भोजपुरी गानों के विडिओ पर लिखने का था । यह लेख तो नही ,एक टिप्पणी है । जो बात मैंने महसूस की , वह लिखी है ।

 ' पुरुष की स्त्री के प्रति आसक्ति ' , मुख्य रूप से इस विडिओ में इस पर व्यंग्यात्मक प्रहार किया गया है । यह आसक्ति एक रुग्ण अंहकार में बदल गई है । अपनी वर्तमान अवस्था का कोई ख्याल नही है , एक कमरे में 10 जन रह रहे हैं ,पर लडकी लंदन से लाएंगें । एटसेटरा । 

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आसक्ति , सामाजिक -व्यक्तिगत समस्या होती है -हो सकती है । एक बार एक इंटरव्यू मे पढा था कि एक बलात्कारी को अपने किए का कोई पछतावा नही था । वह कन्विनस्ड था कि स्त्री को इसीलिए बनाया गया है । क्या यह भी रुग्ण अहंकार ही नही है ।

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मंगलवार, 2 अप्रैल 2024

 

हमारे यहाँ चातुर्मास की सूचना -

C/p

 आदरणीय बंधुओं आप सभी को बड़े हर्ष के साथ सूचित किया जाता है आज*आचार्य प्रवर श्री ज्ञान मुनि जी महाराज साहब* ने 2024 के चातुर्मास हेतु सैक्टर 11 रोहिणी दिल्ली के। लिए स्वीकृती प्रदान की एवं साध्वी रत्ना श्री जागृति श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा के लिए भी स्वीकृति प्रदान की 

  आप सभी से अनुरोध है कि इस चातुर्मास में अधिक से अधिक तप त्याग तपस्या कर धर्म लाभ ले

निवेदक

श्री एस एस जैन सभा

सैक्टर 11 रोहिणी दिल्ली

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