शनिवार, 24 दिसंबर 2022

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2022

सबकी अपनी अपनी दृष्टि होती है ।

हमारे नेता राहुल गांधी जी के लिए :

हैंडसम

स्मार्ट

बुद्धिमान

दुर्धर्ष

निडर
साहसी
कृतज्ञ*  
हँसमुख 
खुश तबीयत
सत्य विनम्र
स्वयं सूर्य **
मेहनती
पराक्रमी
बच्चों मे बच्चे 
जवानों मे जवान
तुम पूर्णायु होना
तुम दीर्घायु होना ।

*इस गुण को समझना आज के बुद्धिजीवियों के लिए मुश्किल है ।उनका भी कसूर नही है । जब जमाना ऐसा हो कि एक गैरतमंद इन्सान यह कहे कि मेरे ऊपर ये अहसान करना कि मुझ पर कोई अहसान न करना ।तब इस गुण को समझना लगभग नामुमकिन है ।इस गुण को वही समझ सकता है जिसने स्वयं अपने ऊपर अहेतुकी कृपा अनुभव की हो ।
दुनिया को ये सब बातें मूर्खता ही नजर आती है ।
मै भी मुर्ख हूं ।
अब इस बात मे कौन सी समझदारी है कि लेखकों की दुनिया मे महावीर स्वामी जी का झंडा उठाकर चले आए।
 अगली मूर्खता - एक बन्दी को चुना जो दिल्ली छोड़ो,भारत मे ही नही रहती । .....so on .
.......

कोई तुम्हारे ऊपर से पहाड जैसा बोझ हटाकर फूल के जैसा हल्का बना दे तो वह खुशी मै जानती हूं । फिर मै क्यो नाम न लूं अपने गुरुओं का ।अपने महावीर स्वामी जी का ।

**अपनी उर्जा से चालित होते है ।औरों को भी चलाते हैं ।

रविवार, 18 दिसंबर 2022

lit -song - ये नयन डरे डरे

https://fb.watch/hpgjxnRSBo/?mibextid=92R6eh 

 मुझे मालूम नहीं कि मैं यहां साहित्य की एक नई विधा का आगाज कर रही हूं या नहीं | किसी को पसंद आएगा या नहीं |पर मैंने ऐसे फील किया है इसलिए मैं लिख रही हूं  |

एफबी पर स्क्रोल करना तो अब हम सब की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है | कभी मतलब से तो, कभी बेमतलब | AI भी हमारी पसंद के रील्स , वीडियोस , सर्च रिजल्ट दिखाता रहता है |ऐसे ही यह गाना मेरी नजर में आया |मैं देखने लगी और मेरी कल्पना सक्रिय हो गई |

यह सत्यजीत रे की फिल्म चारुलता है  |यह फिल्म रविंद्रनाथ की कहानी नष्टनीड़  पर आधारित है |गाना लता मंगेशकर ने गाया है |यह गाना इस फिल्म का नहीं है |मूल फिल्म कोहरा ,संगीत हेमत कुमार है |यहाँ इनकी मिक्सिंग की गई है |

साहित्य और कलाओं के लिए क्लासिक -यह एक शब्द चलता है |कालजयी | विचित्र बात है न | काल के आगे जब मनुष्य भी नश्वर है तब मनुष्य द्वारा रचित कल्पनाएं कालजयी  होने का दर्जा पा लेती हैं |

मैंने यह फिल्म नहीं देखी |नष्टनीड  कहानी पढ़ी होगी पर अब याद नहीं  |फिर किसके पास समय है रविंद्र नाथ के धीर, गंभीर, कोमल मन स्त्री- पुरुष पात्रों की संवेदनाएं समझने का |वे सब हमारे समय से कितना पीछे छूट गए हैं| इस तरह इस गाने में दिखाए गए स्त्री पुरुष को मैंने स्वतंत्र रूप से देखा |उनके कथा संदर्भ से अलग |लता मंगेशकर की आवाज और गाने के बोल ने मुझे बांध लिया और मैंने अपनी कल्पना में यह रच दिया |

********************

 दो जन है |एक स्त्री  है  | एक पुरुष है |उनके चारों और समृद्धि ऐसे बिखरी है जैसे शरद ऋतु की चांदनी पूरे जगत में बिखरी रहती है |उन्हें परवाह ही नहीं है | उनके विरक्त हृदयों  के लिए यह समुद्र किनारे की रेत की भांति निःसार  ,रसहीन है|

स्त्री अबोध है , अनजान है |दुनिया की सैकड़ों ,हजारों, लाखों ,करोड़ों बातों का उसे कुछ भी ज्ञान नहीं | वह बस एक बात जानती है -मुझे पुरुष के साथ रहना  है |जैसे ये रहे ,जैसे ये कहें |

 पुरुष ज्ञानी है |दुनिया की सैकड़ों, हजारों ,लाखों, करोड़ों बातों का उसे ज्ञान है |वह चाहता है बंधनों से  निकलना पर अभी स्त्री के बंधन में हैं |वह अनुसंधानरत है कि संसार से मुक्ति का मार्ग इसके लिए भी बने| वह दिन-रात इसी उधेड़बुन में है |

स्त्री का रागी -वैरागी मन - आधा  संसार के आकर्षण में  ,आधा प्रिय की उधेड़बुन में |वह कहती कुछ नहीं| गूंगी बनी रहती है |मन की कल्पना को मन ही मन इस गाने में पिरो रही है |

ps - दो दिन लग गए मुझे इससे बाहर निकलने में| दुनिया में बहुत से नशे और नशे के प्रभाव पर बातें होती हैं  |मैं कहती हूं संगीत भी एक नशा है | कभी ना कभी इस पर भी पुस्तकें अवश्य लिखी जाएंगी कि इस नशे से बाहर कैसे आए| 

ps -2  you know , sometimes we are caught in situations like silence means not responding,responding means conflict of mind -what to respond .........then u choose to pause ......unable to control ur anger  .....and yet knowing  the inevitability of such situations.....and knowing ......we are all fighting the same thing.....knowingly or unknowingly. 

बुधवार, 14 दिसंबर 2022

भारत जोड़ो यात्रा के गहरे निहितार्थ -1

राहुल गांधी जी की भारत जोड़ो यात्रा चल रही है |अगर इस यात्रा के गंभीर चिंतन अभिप्राय की ओर ना जाए ,केवल उन तस्वीरों को देखें जो उनके एफबी पेज पर रोज अपलोड होती हैं तो एक सामान्य दर्शक भी इस यात्रा के गहरे निहितार्थ का एक दर्शन किए बगैर नहीं रह सकेगा |

कन्याकुमारी से कश्मीर तक चल रही है यह यात्रा कई राज्यों को पार कर चुकी है |केरल, तमिलनाडु ,आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश से होती हुई यह आजकल राजस्थान में चल रही है |इस लंबे वक्त के दौरान की तस्वीरों को हम देखें तो यह देश की संकुचित दृष्टि को तोड़कर देश को देखने की एक वृहद दृष्टि देती है |

- देश लोगों से बनता है | लोग अलग-अलग रूप रंग के होते हैं | कोई काला ,सांवला ,गोरा ,गेहूंआ ,छोटा ,नाटा , लंबा , मोटा, पतला होता है | अलग-अलग अवस्थाओं के होते हैं _बच्चे ,बूढ़े, जवान,अधेड़ | उनमें लैंगिक विभिनता होती है - पुरुष ,स्त्री , ट्रांस |वे अलग -अलग  धर्म के होते हैं - हिंदू ,मुस्लिम ,सिख ,इसाई ,जैन| वे अलग-अलग प्रोफेशन के होते हैं - वकील, एक्टिविस्ट , अभिनेता -अभिनेत्री ,सफाई कर्मी ,दुकानदार , डॉक्टर, टीचर, क्रिकेटर |

 -यात्रा में आए हुए लोग राहुल गांधी जी के साथ फोटो खींचाते हैं |शायद सबको तो मौका नहीं मिलता होगा |यह संभव भी नहीं है |लोग घर से अपने बच्चों को तैयार करके लाते हैं |उन्हें नए कपड़े ,जूते पहनाकर -सजा कर लाते हैं |बहुत से बच्चे विभिन्न प्रकार की वेशभूषा में सज कर आते हैं |बड़े लोग भी ,ध्यान आकर्षित करने के लिए ,अलग वेशभूषा में आते हैं |यह सब  मिलकर एक मानव नदी का रूप धारण कर लेते हैं |एक ऐसी नदी जो कभी हंसती -खिलखिलाती हुई दिखती है ,तो कहीं मध्यम शांत गति में बहती नजर आती है |

यह सब भावनाएं भारत यात्रा की तस्वीरों को देखने मात्र से मन में उद्बुद होती हैं |साथ ही मन में प्रश्न उठता है -इतनी अधिक विविधताओं को एक पहचान के पीछे कैसे धकेला जा सकता है | यही भारत जोड़ो यात्रा के निहितार्थ हैं |

Ps: हुआ तो हम भी आएंगे इस यात्रा मे ।जब यह दिल्ली आएगी ।मेरी बहन के हसबैंड है ।अंकित जी ।उनके साथ हम सब आएंगे ।

बुधवार, 7 दिसंबर 2022

You tube channel

यह पोस्ट reels के लिए भी उतनी मौजूं  है ।

Ask urself one simple question.  What exactly was that chull- चुल्ल, that led you to read history ,an otherwise considered boring thing .Can u transfer it to others ?

If one is not scholar even . I mean one is not

making money out of it . 

If one has content,   has a way to see things ,has a style of writing,  rest can be learned easily. 

Be compassionate to ur readers/ viewers.  Remember they are normal ppl . They may not hv that chull .😊

 ....

#old post 

You tube पर कैसा कन्टेन्ट चलता है ,इसे गूगल करो तो -

How to guide tutorials

Fun content

Educational 

वगैरह बहुत जानकारी है ।सारी लगभग सही है ।

मै तो दृष्टि को महत्व देती हूं । वे ही चीजे ज्ञान की प्रसारक हैं ,वे ही अज्ञान की ।

उदाहरण के लिए एक फन सेग्मेंट अमीर-गरीब की असमानता की है ।मुझे तो बेहूदा लगती है ।

उनके यहाँ तो हर कमरे मे एसी ।हमारे यहाँ एसी कमरे मे सब एटसेटरा।

इसे देखकर अच्छा भला व्यूअर भी काम्प्लेक्स मे आ जाए। 

 कुछ हद तक अमीरी -गरीबी भौतिक है ,पर उसके आगे यह मानसिक है ।

अगर यह न हो तो हम संतों के आनन्द को कैसे समझेंगे। 

खैर 

Some ideas :

1 मुझे एक बार ऐसा विडिओ पसन्द आया था ।एक सुन्दर ,युवा लड़की जल्दी जल्दी ,तुरन्त वाहन से उतरकर किसी खाने की जगह का परिचय करा रही है ।

Hit point in that video was -speed and background music . 

मैने सोचा था कि टीम मे हम ऐसे विडिओ किताबों को promote करने के लिए बनाएंगे।  

I am hiding the secret behind this idea to save it from being stolen. 

2 funny videos पसन्द आते है ।I hv an idea related politics .

Relax .concentrate. see your own previous work .and say to yourself-मैं नही तो कौन बे ।





सोमवार, 5 दिसंबर 2022

😊😂

अनुपमा सीरियल का ट्रैक अब यहां आ गया है कि अनुपमा को यह शंका हो रही है कि डिंपी की मदद करने का डिसीजन लेकर कहीं उसने अपने परिवार को खतरे में तो नहीं डाल दिया। 

मैं कहूंगी बिल्कुल नहीं। एक इंसान ज्ञानपूर्वक जिन बातों को सही मानता है, अगर वह उनका आचरण नहीं करेगा तो उसका ज्ञान वापिस अज्ञान में बदल जाएगा । वह फिर दोबारा वही पहुंच जाएगा जहां से उसने शुरुआत की थी ।

ज्ञान तक पहुंचने की यात्रा मामूली नहीं होती ।आसान भी नहीं होती। कितने लोगों का श्रम, शोध, साहस लगा होता है, इंसान को बनाने में ।

 मैं अपनी ही बात करूं तो पीएचडी तो दूर, मैं तो m.a. भी नहीं करना चाहती थी। यह तो मेरे पापा ने पुश किया तो मैं इस तरह आगे पढ़ती गई। 

now ,how grateful i am today to him .

 बारीकी से देखा जाए तो मानव सभ्यता को यहां तक पहुंचने में कितना वक्त लगा है ।इस यात्रा में छापा मशीनों और दूसरी तकनीकों का कितना अधिक योगदान है।

 शास्त्रों के ज्ञान के लिए मैं कितनी शुक्रगुजार हूं अपने गुरुओं और गुरु परंपरा की तथा शास्त्रों की पुस्तक लिखने वालों की। 

रही बात खतरे की तो मुझे बताओ! क्या वे लोग जो कुछ भी ऐसा काम नहीं करते जिन से खतरा हो, क्या खतरों से बचे रहते हैं? क्या उन्हें किसी भी तरह के कष्टों का सामना नहीं करना पड़ता?  

डरने से भी क्या हो जाता है ।कुछ नही । अपनी तरफ से कोई ऐसा काम नहीं करती किसी को बुरा लगे बाकी महावीर स्वामी जी के ऊपर छोड़ा है।


रविवार, 4 दिसंबर 2022

3 . 12. 22 का दिन

यह दिन एक जरूरी मुद्दे के विभिन्न पहलुओं पर चिंतन करते हुए बीता | गोवा फेस्टिवल में कश्मीर फ़ाइल्स को ज्यूरी के एक सदस्य ने प्रोपेगेंडा और वल्गर फिल्म कहा था | 28. 11 .22 को एफबी पर मनीष सिंह की एक पोस्ट पढ़ी थी -पल्लवी जोशी पर |इस मुद्दे पर यह एक टिप्पणी थी , उनके अपने अंदाज मे | फिर अगले दिन डाॅ कुमार विश्वास की एफबी पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की पोस्ट पढ़ी | इस पोस्ट ने मुझे इस मुद्दे पर सोचने को प्रेरित किया |

 इस फिल्म के मुद्दे ,टारगेट ऑडियंस ,फिर उसके बाद राजनीति के शीर्ष के लोगों द्वारा इसका प्रोत्साहन  : यह तो चलो है ही |इस पर मुझे कुछ नहीं कहना | यह फिल्म कमर्शियल भी सफल हुई है |यह अवश्य सोचने की बात है |

 क्या यह फिल्म की अपनी अपील की वजह से हुआ ? लगता तो है | 

आलोचना के कौन से सिद्धांत के द्वारा इस फिल्म की सफलता की जांच की जाए ? साहित्य और फिल्म का मीडिया अलग होता है |फिर भी मुझे लगता है कि भाव को समझने के नियम वही होते हैं | 

क्लीयरली यह भाव परिष्कार तो नहीं है  |फिर क्या इसे पाश्चात्य काव्य सिद्धांत- विरेचन के प्रोसेस से समझा जाए ?

क्या विराट जनरूचि को इस तरह नियंत्रित किया जा सकता है ?  वैसे भक्त तो इस मामले में अति उत्साहित ,अति आत्मविश्वास से लबरेज नजर आते हैं |हर फिल्म को बायकॉट करते दिखते हैं |लेकिन यह सच नहीं है |अगर होता तो मोदी जी पर बनी फिल्में भी चलती |

 इन सब बातों ने मुझे सहृदय कौन है ? इस प्रश्न पर पुनर्विचार के लिए प्रेरित किया | इसकी काव्य रुचि किस प्रकार की होती है ?इस प्रकार की काव्य रूचि  की विशेषता क्या है |क्या यह एक विशिष्ट आर्थिक वर्ग से संबंध रखता है ?आदि आदि |

 बहुत देर तक काव्य सिद्धांतों पर लिखे लेख पढ़ती रही |प्राचीन काव्य सिद्धांतों में इसे एक काव्य रसिक , काव्य का ज्ञाता ,तदनुरूप  अनुभूति को भावित करने वाला "समान हृदय " का  कहा गया है |आलोचना पत्रिका में प्रकाशित काव्य निर्णय पर एक लंबा लेख पढ़ा | उसमें तो कुछ ज्यादा पल्ले नहीं पड़ा | इस तरह यह दिन ऐसे ही बिना किसी समाधान के गुजरा |इस संबंध में मेरी अपनी भी एक दृष्टि है | यह आलोचना का एक गंभीर विषय है | जिनकी रूचि हो उन्हें भी इस विषय पर उन्मुख होना चाहिए |

गुरुवार, 1 दिसंबर 2022

1 अभी मुझे बहुत सी बाते सीखनी है ।इस कहानी मे मैने आलोक धन्वा की कविता की पंक्तियाँ ली है ।पूर्व अनुमति नही ली ।लेकिन अभी कही कमर्शियल भी छपने के लिए नही दी । पता नही क्या नियम है ।


वैसे तो हमारे बीच मे diversity ही रहती है । unity तो बाहरी प्रभाव के टाइम पे दिखती है ।वो भी थोड़ी-बहुत । ये भी अच्छी बात है । हमे ये क्लीयर नही कि हम किन बातों मे एक है ।ये तो क्लीयर है हम किन बातों के न होने मे एक है ।😂

#unity in diversity 
3 👍रवीश जी