बुधवार, 31 मई 2023

राहुल गाँधी जी के वीडियोज- 3-4-5

3 कोरोना समय का पहला वीडियो भी मेरी स्मृति में है।  वीडियो में राहुल गांधी जी ने बेहद संजीदा पूर्ण लहजे मे  कहा था कि तकलीफ का समय हमारी क्षमता को जांचने की अपॉर्चुनिटी भी होता है। 

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बाद में इस बात को 'आपदा में अवसर ' के जुमले मे ढाला गया  और ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी की शर्मनाक परिणति हुई । यह इस प्रसंग एक अलग लेवल का डिग्रेडेशन है ।खैर 

4 राहुल गाँधी जी की कैंब्रिज स्पीच तो एक राजनेता के रूप में उनके गंभीर चिंतन का उत्तम उदाहरण ही है।

5 गुजरात इलेक्शन से पहले की स्पीच भी बहुत शानदार  थी। यह और बात है कि कांग्रेस वह चुनाव हार गई थी।😂

सोमवार, 29 मई 2023

राहुल गाँधी जी के वीडियोज- 2

यह वीडियो हिंदू कॉलेज के मैस के छात्रों के बीच हुई बातचीत दिखाता है -

अगर हम भारत जोड़ो यात्रा के तमाम वीडियो और रील्स को देखें तो मुख्य रूप से ये मुद्दे चिंतन के केंद्र में दिखते हैं।

 1 मीडिया की उदासीनता - जनता के मुद्दों पर उदासीनता का मुद्दा असल मुद्दा 'खबर ना दिखाना नहीं ' बल्कि उन समस्याओं के समाधान के प्रति उदासीनता है कि समाज में यह जागरूक चेतना क्यों नहीं है ।

इस वीडियो में राहुल गांधी जी फोर्सेस की बात करते हैं कि वे कहां है जो इन समस्याओं को समाधान की ओर ले जाए ।

2 ट्रोल से कैसे निपटे -  इस प्रश्न का समाधान राहुल गांधी जी महात्मा बुद्ध की इस शिक्षा से देखते हैं कि तुमने अगर गाली नहीं ली तो वह तुम्हें मिली नहीं। वह इस विचार का लाइव डेमो मोबाइल या किसी चीज के पकड़ने से करके दिखाते हैं । निश्चित रूप से समस्त नकारात्मकता के सामने यह  एक दुर्धर्ष आत्म का अपराजेय उद्घोष है।

 मुझे पत्रकार आशुतोष का लिखा हुआ एक लेख याद आता है की सभी गांधीओं में अकेले राहुल हैं जिन्होनें खूब नकार झेला है । इनसे पिछले वाले  स्वीकार के सुगम पथ पर चलकर आए थे ।

 3 इंडिया की मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना 

4 शिक्षा 

5 विभिन्न आर्थिक वर्गों की समस्याएं इत्यादि 

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इस वीडियो में राहुल गांधी जी थॉट और ऑब्जरवेशन पर एक दिलचस्प बातचीत की है ।

थॉट क्या है ?  यह हमारी धारणा , पूर्वग्रह, सम्मति कुछ भी हो सकती है। बहुदा हम अवेयर नहीं होते ।हम यह भी नहीं जानते की इसका निर्माण हमारे भीतर किस तरह होता है। पर हम इसके द्वारा संचालित होते हैं ।

ऑब्जरवेशन है - देखना । बिना थॉट के देखना ।

एक उदाहरण से समझाने की कोशिश करती हूं। भिखारी दया के पात्र हैं। यह धर्म के तहत प्रचारित एक सर्वमान्य विचार है। लेकिन यह भी देखा जाता है कि भीख मांगते समय वे दीन होने का अभिनय करते हैं ।भीख प्राप्त होने पर बाद में मुस्कुराते हैं। खुश होते हैं ।एक तो यह स्वाभाविक भी है । उनमे से कई ढीठ किस्म के 'दूसरे को कैसा उल्लू बनाया' के ख्याल से खिल्ली उडा कर खुश होते है ।

कहने का अर्थ है- ऑब्जरवेशन विचार के विपरीत भी हो सकती है । तब अगर आप यह विचार बना ले की सभी मांगने वाले ऐसे कपटी होते हैं। यह भी सत्य के विपरीत एक विचार ही है।

इस बातचीत का सार है - सजगता ।

ताकतवर और कमजोर का एक प्रसिद्ध बिंब हाथी और चूहे के माध्यम से समझाया जाता है। यह भी एक विचार है । ऑब्जरवेशन यह भी हो सकती है कि हाथी तो चूहे को बचाना चाहता है । चूहा नहीं मान रहा है ।उछल उछल कर खुद हाथी के पैरों में आ रहा है। 

इस बातचीत का सार है - सजगता ।

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रविवार, 28 मई 2023

राहुल गाँधी जी के वीडियोज- 1

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माॅरिस नगर, दिल्ली के ias aspirants से बातचीत -

राहुल गाँधी जी ऐसे अकेले राजनेता है जो जहाँ तहाँ जनता के बीच में जाकर उनसे बातें करते , उनकी समस्याएं सुनते नजर आते हैं ।

वैसे तो यह राजनेता बड़े प्रतिस्पर्धात्मक होते हैं । आपस में एक दूसरे  के कार्यक्रम ,स्टाइल ,योजनाएं , नारे स्लोगन एटसेटरा सबकी नकल कर के,  दूसरे नाम लगाकर पेश कर देते हैं । लगता है उनके इस कार्य में किसी को दिलचस्पी नहीं है ।

राजनेताओं के कार्यक्रमों और इंटरव्यूज को लेकर एक आक्षेप यह है कि यह सब प्रचार के लिए है । अक्सर प्रश्न पहले से तय होते हैं इत्यादि।  आज के जमाने मे यह झूठ भी नहीं है ।

राहुल गांधी जी के वीडियो देखें तो यह एक दूसरे तरीके  से जनता के अविश्वास की हद लांघते नजर आते है । वीडियो में प्रश्नो  -उत्तरों की गहराई यह साबित करती है कि इस चर्चा के द्वारा वे श्रोता को विचार का कौन सा पहलू दिखाना चाहते हैं ।

इस वीडियो में वे माॅरिस नगर, दिल्ली के ias aspirants से बातचीत कर रहे हैं । भारत  की शिक्षा प्रणाली की यह खामी है वह अधिकांश बच्चों को टाॅप पाँच जॉब का लक्ष्य देती है । जो उनमे सफल हैं , वे सफल हो जाते हैं। बाकी असफल मान लिए जाते हैं ।

यही मुद्दा वे छात्रों के आगे रख रहे हैं । छात्रों के जवाब और राहुल गांधी जी के प्रतिप्रश्नों (counter question )से इस मुददे से जुड़े कई दिलचस्प पहलू दर्शकों के सामने खुलते हैं ।

आपने यह कैरियर क्यों चुना ?  जवाब में अधिकांश छात्रों का जवाब था । इस नौकरी में इज्जत है , पैसा है । 

चलो! यहां तक तो ठीक है। मां -बाप अपने बच्चों के उत्कृष्ट भविष्य की सोचते है । प्रशासनिक सेवा का कैरियर सर्वोत्तम माना जाता है ।अगर ये छात्र मां-बाप या समाज के दवाब में भी आ गए तो यह कोई बुरी बात नहीं है। 

बैकअप क्या ? अगर यहां सफल नहीं हुए तो आपका बैकअप क्या है ।आपका प्लान बी क्या है? पूछने पर सब चुप थे । एक छात्र ने कहा कि प्लान बी बनाना ही नहीं है ।

बस यही मुद्दा इस बातचीत का मुख्य मुद्दा है । अगर हम ias coaching कराने वालों या मोटिवेशनल स्पीच देने वालों के व्याख्यान सुने  तो वे एकलक्ष्ता, फोकस रहना, एकाग्रता को सफल होने का मंत्र बताते हैं । अगर जीवन में सफल होना है तो प्लान बी ना बनाओ । इससे  तुम्हारे प्रयास की एक निष्ठता टूटेगी । विकल्पों मे फँसकर तुम्हारे  मन की एकाग्रता खंडित हो जाएगी।

 मन की शक्ति को केंद्रित करने की यह बातें अपनी जगह सही हो सकती हैं। लेकिन इनसे परिक्षा का गणित  तो नहीं बदल जाएगा । अगर 500 सीटों के लिए 10,000 बच्चे आ रहे हैं तो 9500 का असफल होना निश्चित है। तब वे  क्यों जीवन भर अपने आपको असफल मानकर निराशा और फ्रस्ट्रेशन में जीएं ।

 जिंदगी गणित है -  राहुल गांधी जी छात्रों को यही गणित समझा रहे हैं ।आप कहेंगे - सर जी ! ऑलरेडी भी तो यही हो रहा है । जो असफल होते हैं वे कहीं ना कहीं दूसरी जगह पर चले जाते हैं । जिन्दगी अपने आप इंसान के प्लान बी सी डी ..... बनवा ही देती है ।

हम कहेंगे-  हां जी! आपकी बात ठीक है । मगर इस तरह  असफल होकर,  मन मारकर, उल्टे सीधे गलत समझौते करके , आप एक फ्रस्ट्रेटेड जिंदगी गुजारोगे। खुद अपने पर ,परिवार पर और समाज पर निराशाओं का बोझ उतारोगे । अपने पूरे पोटेंशियल को जाने बिना एक कामचलाऊ नौकरी करोगे और यह सब  इसलिए होगा क्योंकि आप इतना गणित नहीं समझ पाए,  स्वीकार नही कर पाए कि अगर 500 सीटों के लिए 10, 000 बच्चे आ रहे हैं तो  9500 का असफल होना निश्चित है । इसका यह अर्थ यह नही है कि 9500 अयोग्य हैं ।

बस!  एक इस बात से ही जिंदगी ने  आपको चलाया या आपने जिंदगी को चलाया ;  कर्ता कौन ? का मसला तय हो जाता है ।

मन के रहस्य गहन होते हैं । गलत जानकारी , गलत विश्वास दीर्घकाल तक मनुष्य को सालते रहते हैं । खुशी की बात है कि अंत में एक छात्रा ने इस बात को ज्यों का त्यों समझा ।

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शुक्रवार, 26 मई 2023

काम करते हुए, साथ ही एक सही और सच्चे मार्ग पर चलने की असीम खुशी को जीते हुए मुझे महसूस होता है कि  मै ऑलरेडी सफल हो चुकी हूं । 🥳🥳😊
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नाॅर्मली मै स्त्रियों की प्रशंसक नही हूं । पुरूषों का प्रभाव जीतने मे स्त्रियां आपस मे सतत संघर्षशील, ईर्ष्यालू और शक्तिशाली होती है ।

'काम' -क्षेत्र के भीतर पुरुष भी ऐसे ही होते है ।

यह बात समझते हुए भी मैने टीम मे दो स्त्रियों को चुना था कि घर से बाहर एक स्त्री अन्य स्त्रियों के साथ ही सुरक्षित है ।😊

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मोबाइल क्रान्ति के जमाने मे भी कम्यूनिकेशन की प्रॉब्लम होनी 
असलियत मे संभव है । 
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गुरुवार, 25 मई 2023

मंगलवार, 23 मई 2023

सोमवार, 22 मई 2023

लेखक घर - यह नाम कैसा रहेगा । 

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" बेगानी शादी मे अब्दुल्ला दीवाना " इस मुहावरे का एक विलक्षण अर्थ मुझे अणु के बर्ताव मे दिखता था । कई साल पहले , हम तो लड़ते थे , मान जाते थे ।ये चल रहा था । बट मै नोटिस करती थी यह हमारी खुशी मे खुश होती थी । मै सोचती थी ये क्यों......

बट इसे देखकर आह्लाद होता था ।  

#यूं ही

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रविवार, 21 मई 2023

😊

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शुगर होने के बाद, अब तो मीठी चाय भी लग्जरी है।

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शनिवार, 20 मई 2023

पहले तो इस तरह जल्दी जल्दी करेंसी नही बदलते थे । पता नही क्या हो रहा है ।

गुरुवार, 18 मई 2023

अभी चार दिनों के लिए हमारे यहां जय मुनि जी ठाणे -6 ( अर्थात टोटल छह संत)आए थे । खासी हलचल रही । अच्छा लगा ।अब चातुर्मास मे आएंगे ।


सोमवार, 15 मई 2023

 मेरा मन है कि मै विश्व प्रसिद्ध नेता राहुल गांधी जी के वीडियोस पर एक सीरीज लिखूंगी । देखो ! कब शुरू करती हूं ।

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अधिकार की बात भी पेचीदा सी है । आजकल तो इसका खूब प्रचार है । सब वर्ग, लिंग अपने अपने अधिकार की बात करते दिखाई देते है ।

मुझे इन पेचीदगियों मे नही जाना ।

मेरी बीन का सुर ही अलग है । मै दुनियावी अधिकार की समर्थक होते हुए भी सद्भाव धारण करने के आत्मा के अधिकार को पहचानने की वकालत करती हूं । 

ये बात अलग है कि यह सुर समझ मे आना मुश्किल है ।खैर 

मै सोचती हूं '  फूट लेने का अधिकार 'भी कुछ होता होगा ।🙂

रविवार, 14 मई 2023

मुझे बहुत समय से लग रहा है मेरा काम पूरा हो गया है । जिसने जो समझना था समझ लिया ।आजकल के जमाने मे लोग इतने मैच्योर है कि क्रांति का अर्थ मुझे तो शान्ति ही पसंद है । 

जिस तरह मै लिखती हूं , कोई भी ये समझेगा कि मैने सबको जैनी बनाने का अभियान छेड़ रखा है ।

ऐसी बात नही है । मै बस शब्द और आचरण की दूरी घटाना चाहती हूं , जितना रियलिस्टिकली संभव हो सके ।

जैन होना मेरा मन है , प्राण है । अगर आप शब्दों की अपरिचित -पन को पार कर लो तो आप पाओगे कि यह न सिर्फ वर्तमान जीवन बल्कि आगे के जीवन का भी प्रशस्त ,उत्तम मार्ग है ।
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प्रसिद्धि को नापने का भी तरीका होता है । एक्टर्स की पेमेंट , मार्केट वैल्यू ऐसे ही तय होती है । ... पर इसका तरीका मै नही जानती ।
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लोगो के बीच मे एक मूलभूत विभिन्नता लैंगिक होती है । मगर विमर्श का वह बहुत ऊंचा लेवल है जहां यह विभिन्नता खत्म होती है ।उसके नीचे तो तू तू -मैं मैं ही है ।
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शनिवार, 13 मई 2023

Big win karnataka 👍🇹🇯
Congratulations! 
🥳🎊
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Hearing clip on congress Twitter since morning : 😊
I'm unstoppable
I'm a Porsche with no brakes
I'm invincible
Yeah, I win every single game
I'm so powerful
I don't need batteries to play
I'm so confident
Yeah, I'm unstoppable today
Unstoppable today
Unstoppable today
Unstoppable today
I'm unstoppable today
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शुक्रवार, 12 मई 2023

अब तक मेरा मन स्लो मोशन ख्यालों मे था ।अब तीन बजे 12 और 10 के रिजल्ट आए है और बातों की इतनी हलचल मच गई है ।😊

गुरुवार, 11 मई 2023

आज bhadas4media पर मेरा लेख पुष्पा जिज्जी चैनल शेयर हुआ है।

yipeeee....

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ज्ञान और आजीविका-धन का अन्तरविरोध दुनिया के बेहतरीन अन्तरविरोधों मे से है । बहुत शक्तिशाली है । चिरकालीन है ।

ज्ञान मद , धन मद भी कोई बातें होती हैं इस दुनिया मे ।

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केवल उस की कृपा से ही हम इन बातों की अजानता की क्षुद्रता को जान सकते हैं। मन मे इतनी क्षमा होनी गुरु की कृपा से ही संभव है ।

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बुधवार, 10 मई 2023

https://www.facebook.com/100004042357156/posts/pfbid0HfYnYHr1qtgi1kiwCgXDgws1V4MvnuNa3V7XE5hxP7u8MFGrTCYP9hk3P6wxf5Aml/?mibextid=DcJ9fc 

पहलवानों के आन्दोलन पर एक पुलिस वाले की कविता । मै इनकी मौसी सास हूं । मेरी बुआ की बेटी के जंवाई। 😊

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सब आश्चर्यचकित होते होंगे ,मेरे रूखे सूखे पन को देखकर। सच तो यह है कि मै और भी अधिक रूखी सूखी होना चाहती हूं ।जीवन का शुभ सुख यही है ।

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मंगलवार, 9 मई 2023

अब तक मैने जो भी पढा है - शास्त्र और इतर किताबों में  -उनका सार यह है- हिंसा और परिग्रह से विरति ।

विरति का अर्थ है -व्रत लेना ।

साधु -साध्वी सर्व विरत होते है ।उनके व्रत 3करण 3 योग से पाले जाते है ।

श्रावक -श्राविका देश विरत (कुछ अंश मे )होते है । उनके  व्रत के 49 भंग है । भंग अर्थात विकल्प। वैसे तो जैनी भी ज्यादा नही जानते विकल्पों के बारे मे ,पर  हिन्दी वाले सुनेंगे तो अवश्य गश खाकर गिर जाएंगे ।  उस पर फिर कभी ।

अब जैन धर्म मुख्यतः बनिया में  है ।इनका हिंसा का तो काम नही पडता , परिग्रह का ये पालन नही करते 😊

परिग्रह का नाम लेते ही आप के मन मे यह आएगा कि साल मे चार साडी । बट ! यह भी आपके माइंड की एक सेट सोच है ।

मैने परिग्रह की व्याख्या यूं की है कि कमाने की क्षमता मे से मर्यादित धन निकाल कर बाकी का त्याग करना ।

संसार अवस्था में  , इस विरति मे ही संसार की सारी शक्तियां है । इस सोच मे मेरी बुद्धि स्थिर है। 

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Comment on my wall . I may join fb .so that things start move .

सोमवार, 8 मई 2023

आज गोहाना आए हैं । जो साथ है - वेलकम!😊

मै जो हूं वो तो मै जानती हूं , मै ऐसी क्यों हूं , लेखन मे उन्ही डाॅटस को जोड़ने की कोशिश करती हूं ।

मै लिखती हूं - महावीर! महावीर!  मेरे मन मे यह भी आता है कि ये क्या समझेंगे ।


शनिवार, 6 मई 2023

महावीर वाणी -उपसंहार

महावीर वाणी :यात्रा और अन्तर्यात्रा की यात्रा को मै आत्मज्ञान के मार्ग पर एक स्त्री की यात्रा के रूप मे देखती हूं।  जिसमे यात्री उस तरह सजग भी नही है ,वह तो यह भी नही जानती कि वह किसी यात्रा पर है ;वह तो चल रही थी ,एक बेहद मामूली आम सा जीवन जीते हुए कि उस पर यात्रा का वैभव अपने आप प्रकट हो गया और वह सुखद आश्चर्य मे भरी ,दंग खड़ी रह गई।

अपने जाने मै उत्तराध्ययन से आगे दूसरा ,दूसरे के बाद तीसरा शास्त्र पढ़ रही थी । ....मै समझती हूं मजूमदार की किताब मे दारा शिकोह की दार्शनिकता , उसकी जिज्ञासाएं , अपने समकालीन संतो से उसका पत्र व्यवहार और उसकी ईमानदार कोशिशों के बारे मे पढ़कर- बड़े गहरे तौर  पर मुझे यह भान हुआ कि इस क्षेत्र के आसपास मनुष्य के अस्तित्व संबंधी बेहद गंभीर प्रश्नो की सच्चाइयां है ।पाठक यह  भी ध्यान रखे कि यह किताब एक इतिहास की किताब है ।

एक मात्र अपने गुरु और परिचित संतो के स्नेह के बल पर यह संभव हुआ कि मै आगे से आगे शास्त्र पढ़ती चली गई और मुझे कभी भय नही हुआ।जैसे एक बच्चा पिता की उंगली थामकर पूर्ण निश्चिंतता के साथ मेले की अजीबोगरीब चीजे देख आता है ।वह भयभीत नही होता ।

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एक बार मुझे किसी ने कहा था कि इसमे 'करियर'बनाने का अच्छा स्कोप है ।

बिल्कुल नही।

मुझे भी जो मिला है फ्री मिला है । यह सब पढकर जो भी जो कुछ पावे , वह उसी का है ।

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आत्मज्ञान और सांसारिक ज्ञान मे मै यह मेल देखती हूं कि सांसारिक ज्ञान भी आत्मज्ञान की आभा मे विलक्षण हो जाता है । 

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बौद्धिकों मे ओशो और कृष्णमूर्ति अधिक प्रचलित है ।

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गुरुवार, 4 मई 2023

 ये दुनिया अजीबोगरीब चीजों से भरी पड़ी है । सोने की ताश भी होती है । मैने नही देखी , राजू ने देखी है । 

कपड़े की पुस्तकें होती है । 

मंगलवार, 2 मई 2023

गरीब का बच्चा अभावों मे जीए यह भी हृदयविदारक है पर अमीर का बच्चा अ'भावों' (विपन्नता और उच्च विचार का अभाव -दोनो ही अर्थ मे ) मे जीए ,यह बदनसीबी है , अपनी विराट समृद्ध चिन्तन परम्परा की आशातना है ।

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सब को अपनी बात कहनी चाहिए।  वे क्या समझते है । यह क्या हो रहा है ।इसका क्या महत्व है । क्या ये जरूरी है । क्या ये एक जेनरेशन तक चलेगा । यह किस तरह खत्म होगा । सब कुछ। 

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आज के समय मे सबसे बड़ी क्रान्ति यही दिखती है कि सबको हमारे जैसी शान्ति और विश्रान्ति मिल जाए ।

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