कल प्रभात जी की वाॅल पर मनोहर श्याम जोशी पर उनके स्मरण पढ़े । वे वैसे भी लिखते रहते है । अबकी बार शायद पुण्यतिथी का मौका था ।
पढ़कर अच्छा लगा । सभाओं-संस्थाओं की महनीय औपचारिकताओं से दूर कोई निजी तौर पर अपने प्रिय लेखक को इस तरह याद कर सकता है ,हृदय की प्रेरणा से की गई ऐसी छोटी -छोटी बातों मे कितनी विलक्षणता पैदा हो जाती है ।
मै भी लिखूंगी कभी ,पंजाबी लेखक कुलवंत सिंह विर्क की कहानियों पर । बहुत पहले के बनाए हुए नोट्स रखे है । मै सोचती थी कि अब तो वह चेतना-संवेदना पुरानी हो ली ,जो इनके लेखन मे प्रकट हुई है । देखते हैं ।