गुरुवार, 28 सितंबर 2023

आज यह लिखा है -

आज का दिन इतना चमकीला है कि अगर बाहर से अंदर आओ तो एकदम अंधेरा छा जाता है।

 पेड़ों के पत्ते 5 शेड में दिखते हैं । गहरा हरा ,हल्का हरा....से होता हुआ धूसर ,पीला ।

यह शेड मुझे मैचिंग सेंटर में करीने से लगे हुए कपड़ों की याद दिलाते हैं । रंगों के ऐसे शेड्स ,बढते क्रम में , घटते क्रम में वहीं देखे हैं ।

सड़क पर एक फैमिली गुब्बारे बेचते हुए जा रही है।  आदमी है ।उसकी हट्टी कट्टी औरत है।  दो बच्चे है । पांच -छह गुब्बारे हैं ,फुलाए हुए ।गुब्बारे नए स्टाइल के है । अगर 25 का होगा तो शाम तक डेढ़ सौ रुपए बन जाएंगे । बिना फुलाए गुब्बारे थैली में होंगे।

औरतें स्कूटी पे इधर से उधर जा रही है । अब रोड पे आदमियों के साथ औरतें भी बहुत दिखती हैं ।

#आज का हाल

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शुक्रवार, 22 सितंबर 2023

I think I had misunderstanding yesterday . Anyway .

ये अच्छी बात है कि हमारी स्पीड इतनी स्लो है कि सबको निश्चिंतता रहती है । 

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मैने अपने जीवन मे उन लोगो को फाॅलो किया है जो दूसरों से नही , खुद से ये सवाल पूछते थे कि मै उन लोगों के लिए क्या कर सकता हूं जिन्होने मुझे प्रेम किया है । 

इतनी सद्बुद्धि होना भी गुरुकृपा की देन है ।

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अब तो , कोई बात को यहां तक ले आए है कि अपने fb handleपर शाहरुख की फिल्म की तारीफ मे कुछ लिखो तो लगता है खुद शाहरुख पढ रहे है , पढ़कर हँस रहे है ।

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आर्थिक दर्शन है -मर्यादित परिग्रह। 

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यह पुरानी पोस्ट है। अब भी सितम्बर ही चल रहा है । खैर ... 

इस आधार पर माॅडल बना लेंगे। 

17 sep2022

विचार को अमल मे लाने के तीन तरीके संभव है ।ये माॅडल मैने धर्म के क्षेत्र मे भी देखे है ।

एक - कि अपने सत के दम पर चलते रहो । कद्रदान फाइनेंस करे ।

दो-चंदा से फाइनेंस जुटाओ।

या आत्मनिर्भर रहते हुए काम करो ।

आलोचना तीनो की होती है ।पहले मे कानाफूसी ,अंदर ही अंदर क्या चल रहा का अविश्वास। दूसरे की तो कोई इज्जत ही नही ।तीसरे को धंधेबाज कह देते है ।

बाकि व्यक्तिगत प्रयास है ।

पर्सनली मुझे तीसरा पसंद है।hv filled du forms.

😊बाकी भी कहो ।

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गुरुवार, 21 सितंबर 2023

बहुत बातें ऐसी होती है जो दूसरों के आगे कहने में , पुनः नए ढंग में समझ आती हैं ।

संवत्सरी का जो प्रसंग मैने शेयर किया था , यहां लिखकर , बाद में मुझे रियलाइज़ हुआ कि देखो ! जैनों का मुख्य महापर्व सुदूर अनन्तकाल में घटी एक ऐसी घटना के आधार पर मनाया जाता जिसका जैन धर्म के प्रतीकों या महापुरुषों से कोई मतलब नही है ।

वे लोग जैन नही थे । न ही उन्होने प्रवचन सुने थे ।

प्रकृति मे हो रहे परिवर्तन से अभिभूत होकर स्वतः हृदय की प्रेरणा से उन्होने शाकाहार अपनाया था ।

यह एक बात ही कितनी प्रेरणास्पद है ।

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Me and my family will meet our leader rahul gandhi ji ,may be, someday.


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बुधवार, 20 सितंबर 2023

संवत्सरी सानन्द सम्पन्न हुई।  😊

महानगर की जिन्दगी जीते हुए स्थानक के शान्त वातावरण ने मुझे कैसे खींचा , संभव हुआ तो कभी लिखूंगी। अभी तो ....

कल वहाँ मच्छर नही थे । परम आश्चर्य की बात ।

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सोमवार, 18 सितंबर 2023

कल संवत्सरी है ।सभी से संवत्सरी सम्बन्धी खिमत खिमावना 🙏🏻🙏🏻

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जब तक न शुरु करो तब तक पहाड़ सरीखी लगती है तपस्या। शुरु कर लो तो कब वक्त निकल जाता है पता ही नही लगता ।मेरा रिटायर्मेंट प्लान है कि मै आजीवन एकाशने किया करुँगी। 

हमारे गुरूदेव श्री सुंदर मुनि जी महाराज तो 30 सालों से कर रहे हैं ।

पता नही कर पाऊंगी या नही ।भावना जरुर है ।

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संवत्सरी मनाने का थोड़ा सा इतिहास बता रही हूं । कुछ इन्टरनेट से यूज किया है । कुछ  खुद लिखा है ।

जैन आगम के अनुसार अभी पंचम आरा चल रहा है ।यह 21000 वर्ष तक चलेगा। इसमें 2500 साल बीत चुके हैं । और 18500 साल बाकी हैं ।  उसके बाद छठा आएगा जो  वह भी 21000 वर्ष का होगा। फिर उसके बाद (उत्सर्पिणी का )*पहला आरा आएगा । वो भी 21000 वर्ष का होगा ।इसका स्वभाव छठे आरे के समान होगा मगर शुभता के बढ़ते क्रम मे ।

अभी शुभता का घटता क्रम चल रहा है। 

छठे आरे के 21000 वर्ष तक सिर्फ जलचर, मछली  वगैरह खाते रहने के बाद , क्योंकि धरती पर बिलकुल भी वनस्पति नहीं रहेगी , तब जलवायु परिवर्तन होगा । भीषण गर्मी से तप्त धरती पर मेघों की बरसात होती है। 49वें दिन तक यह बरसात धरती को हरा-भरा कर देती है। फलों वगैरह की पैदाइश होगी । वे लोग उनके देवोपम स्वाद को चखेंगे तब उस समय के लोग यह निर्णय करेंगे कि वे आगे से मांस आहार का त्याग कर देंगे।

इस दिन को अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह संवत्सरी मनाने का कारण है। 

इस पर्व को मनाने का  विशेष महत्त्व है क्योंकि इस पर्व को मनाने में पर्व को मनाने के साथ साथ , तीर्थंकर की आज्ञा का लाभ भी मिलता है। अनंत तीर्थंकरों की आज्ञा का लाभ भी मिल जाता है ।

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* काल के अनुसार समय की सुई जैसे पहले नीचे की ओर और फिर उपर की और गति करती है उसी तरह से पर यहां काल को (अवसर्पिणी काल व उत्सर्पिणी काल) दो वर्गों में बांटा गया है। 

अवसर्पिणी काल में जहां ऊपर से नीचे उतरते हुए धर्म की हानि हो रही होती है, वहीं उत्सर्पिणी काल में धर्म का उत्थान हो रहा होता है। मतलब अवसर्पिणी काल में प्रकृति और व्यक्ति दुख की ओर बढ़ रहा होता है और उत्सर्पिणी काल में सुख की ओर। 

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शनिवार, 16 सितंबर 2023

गुरुदेव श्री सुंदर मुनि जी महाराज के चरणों में जन्मदिन की शुभकामनाएँ ।

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Breaking stereotypes of a politician . we are not used to see this in india . Although traditional things are also liked in india -seeing rahul gandhi ji's ladakh diaries .

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Everyone was speaking hindi so well . 

कितने कमाल की बात है !

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बाइक पर /साइकिल पर खड़े होने को मै लडकों का टशन समझती थी । अब मुझे मालूम हुआ कि इससे थकान कम होती है ।

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गुरुवार, 14 सितंबर 2023

 मेरे लिए हिन्दी का अर्थ है - सहर्ष अपने पापा की इच्छा पूरी करते हुए अंततः यूनिवर्सिटी मे एक कोर्स मे दाखिला मिलना ।😊

बाकी किसी बात की हम दोनो ने ही परवाह नही की ।  वे तो मेरे नेट क्लियर से ही संतुष्ट हो गए।

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बाद मे -

वरिष्ठ आलोचक सुधीश पचौरी जी का हिन्दी को लेकर जज्बा भी  विस्मित करता था ।

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गहराई मे -

मेरे लिए हिन्दी का अर्थ है - मेरी दादी की गम्भीरता और मेरे पापा की विस्फोटकता की भाषा । 

पर अरररर....

वह तो प्रॉपर भाषा भी नही । वह तो बस गहरा मौन है । 

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और अधिक गहराई मे -

यह मौन मैने और भी जगह देखा । और उसकी अभिव्यक्ति के लिए  विकल भाषा भी। 

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मंगलवार, 12 सितंबर 2023

पर्युषण पर्व मे अन्तगढ सूत्र की वाचना होती है । तप और जप का विशेष जोर रहता है ।जिससे जितना बने । सुखे समाधे ।

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मेरी भावना है 7 एकाशने+पौषध की । सुखे समाधे ।

एकाशना -पूरे दिन मे एक बार खाना ।पौषध -व्रत है जैन चर्या अनुसार। 

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रविवार, 10 सितंबर 2023

बुधवार, 6 सितंबर 2023

वे शिक्षक जिनकी मैं कल बात कर रही थी , ऊपर ऊपर से ढोंग करते हैं अ-श्रद्धालू  होने का , चंटई , सन्नी लियोनी । यह एक खोल है जो इन्होंने ओढ़ रखा है अपने भीतर की श्रद्धा को बचाने का ।

अन्यथा कहीं भीतर ये गहरे आदर्शवादी हैं ।  कहीं झलक देखते हैं सच्चाई की, तो झुक जाते हैं।(कड़ी परीक्षा लेने के बाद। इस मामले मे पूरे कडियल हैं )

स्वयं अपने जमाने के माने हुए प्रभावशाली सत्ता पुरुष,  विचार पुरुष, सत्ता-विचार पुरुष होते हुए सबके सामने एक अदना स्त्री से माफी मांगने में भी नहीं हिचकिचाते ।(टाइमलाइन याद रहे)

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मैने कभी लिखा नही । 

क्या फायदा ।

दरअसल हिन्दी मे लोगों के जुड़ने की ऐसी चित्र-विचित्र वैराइटियां है कि ऐसे सरोकार से भी कोई जुड़ सकते है ,यह बात हजम करने मे अभी 1000  साल तो लग ही जाएंगे । 

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#कल शिक्षक दिवस था। 

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मंगलवार, 5 सितंबर 2023

लेखक घर का आइडिया एक शिक्षक की अपने वयस्क होते छात्रों के लिए इस चिन्ता से उपजा है कि ये किस तरह कमा कर खाएंगे। 
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दूसरे ने इस चिन्ता की सच्चाई पर विश्वास किया कि अगर शिक्षक होकर इतनी चिन्ता भी नही की तो वह शिक्षक काहे का।
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चीजे संभव हो न हो , आज मौके पर यह बात दर्ज करते हुए। 😊

सोमवार, 4 सितंबर 2023

सुशोभित ने उपनिषद सीरीज शुरू की है । देखते है क्या पढने को मिलेगा ।

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मैने वरिष्ठ आलोचक सुधीश पचौरी जी के उपन्यास की समीक्षा लिखनी शुरू की थी । सब रेडी है । नोट्स भी बना लिए। बट लिखने का मन ही नही करता ।😊

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