शनिवार, 26 अक्टूबर 2024
रविवार, 20 अक्टूबर 2024
बुधवार, 16 अक्टूबर 2024
सोमवार, 14 अक्टूबर 2024
विचारधाराएं स्थायी नही होती , सफल होने की कामना स्थायी होती है । फिर चाहे युग कोई भी हो । विचारधारा का चोला तो रूख देखकर ओढ़ लिया जाता है ।
सफल होने की कामना में अ-बुद्धिमत्ता कुछ भी नही ।
असफल होने की कीमत पर विचारधारा को पकड़े रहना , यह बहुत बड़ा दांव है ।
दुनिया में कुछ ही दुर्लभ हैं ,जो इसे खेलने (झेलने 😊) में सक्षम हैं । 'वह ' अपने बच्चों की रक्षा करता है
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अहिंसा की विचारधारा राग से वीतरागता की साधना है ।
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मैंने कई लेखकों के अनुभवों में उपहास , तल्खी, कड़वाहट, और अवसाद को देखा है ,जो उन्हे सरस्वती शिशु मंदिर टाइप स्कूल संस्थानों में हुए।
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शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2024
सम्यक दर्शन =2 शब्द
समकित = 1 शब्द , दोनों सेम हैं ।
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दुनिया में जैन धर्म की मुख्य पहचान तपस्या की है । जैनी तपस्या बहुत करते हैं , या प्याज-आलू के नही खाने की या दिन से खाने की ।
सही है ,ये सब बातें जैन धर्म का अंग हैं ।
पर मैं बताऊं आपको , जैन दर्शन का मर्म समकित है । यह सबसे कीमती चीज है ।
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संसार की सभी वस्तुओं में रत्नों को बहुत कीमती माना गया है । जैन दर्शन में रत्नों से भी ज्यादा कीमती हैं समकित ,
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समकित है तो ज्ञान और चारित्र भी रत्न के समान कीमती हैं , ये तीनों त्रिरत्न हैं ।
#महावीर वाणी
गुरुवार, 3 अक्टूबर 2024
सच्चा विश्वासी वह अविश्वासी है जो ईश्वर को प्राप्त हो गया है ।जिसने उसका दर्शन प्राप्त कर लिया है , जिसे उसका ज्ञान है।
अविश्वासी वह है जो विश्वासी ( ईमानदार)है जो ईश्वर को प्राप्त नही है ।जिसने उसका दर्शन प्राप्त नही किया है , जिसे उसका ज्ञान नही है।
दारा शिकोह - मजूमदार
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Whenever I see conflict between faith-non faith , I always remember these lines.
Being a faithful person I never doubted my faith. Nor do I doubt now .
Bt Being a reader of various things , when I came to know Dara shikoh's quest in religion,
I hv some glimpse of non -faithful ppl. May be .
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These are very powerful thoughts. One shd memorise it like a mantra,
And ponder over these lines again and again, day n night, months ,years,
May be then one can know it's meaning . If , HE is kind enough on him .
जैन दर्शन में -
5 ज्ञान हैं - मति ,श्रुत, अवधि,मनःपर्याय , केवल ज्ञान ।
4अज्ञान हैं - मति ,श्रुत, अवधि,मनःपर्याय ।
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आम समझ में अनपढ़ता को अज्ञानता मानते हैं ।
सामान्यतः पढ़े -लिखों में ज्ञान के अभाव को अज्ञान कहते हैं ।
विशेष ज्ञानियों ने ज्ञान की सम्यकता को ज्ञान कहा है , उसकी असम्यकता को अज्ञान कहा है , फिर वह कितना ही बड़ा डिग्रीधारी हो ।
#महावीर वाणी
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बुधवार, 2 अक्टूबर 2024
मंगलवार, 1 अक्टूबर 2024
लेखकों में धर्म के शुद्धतावादी नजरिए की बहुत आलोचना होती है ।अक्सर साहित्य और कलाओं में यह व्यंग्य का विषय बन कर आता है । omg फिल्म में मिथुन* के स्त्रियों से बचकर चलने के स्टाइल को याद कीजिए,
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यह सही है ,कि यह पाखंड भी हो सकता है ।
पर
धर्म के अपने क्षेत्र मे रहे हुए सत्य और झूठ के , पहाड़ - समुद्र जैसे तुलनात्मक अंतर को देखते हुए विशुद्धतम चारित्रिक शुद्धता के आग्रह अनुचित नही दिखते ।
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आप सोचकर देखिए, कहां अहिसा -सत्य आदि आचार धर्म और कहां बलि आदि कु-आचार।
दोनों प्रोडक्ट कामनाओं में विभाजित जनता में 'धर्म 'के लेबल से जाएंगे ,
तो उनमें 'ऑथेंटिक ' जज करने के तरीके को सख्त तो होना ही होगा । नहीं तो धोखाधड़ी की गुंजाइश कम कैसे होगी ।
यही कारण है कि धर्म के क्षेत्र मे चारित्र पर इतना बल दिया जाता है । जब तक साधक का मन अभ्यास में है , वह इसे एक 'आदेश'समझ कर पालन करता है ।
परिपक्वता आने पर , जब वह इसके पीछे के ज्ञान की सतर्कता को जान लेता है , तो स्वयं ही इसमें दृढ़ हो जाता है ।
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सबसे घृणित किस्म की धोखेबाजी धर्म के क्षेत्र में होती है । यही धर्मपुरुषों के महान विषाद कारण भी हैं । धर्म को बचाने के लिए ही वे सतत संघर्ष के कठिन मार्ग पर चलना चुनते हैं ।
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*I wrote this post yesterday. And surprisingly after some time saw mithun post on Manish singh's timeline. coincidence .
Earlier also . Chai.
