गुरुवार, 30 नवंबर 2023

कल मनीष सिंह की पोस्ट पढ़कर बहुत खुशी हुई।  क्या ही अच्छा हो ! सारे हिन्दुस्तान के लोगों मे ऐसी दृष्टि-समझ बने । how I wish! However Knowingly aware that it is only wishful thinking. 

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मंगलवार, 28 नवंबर 2023

कुछ समय पहले मैने एक फोटो देखी थी । बहुत सी डिस्पोजेबल प्लेट्स की । 

देखो तो , दिखे की- उल्टी रखी है । बट देखते देखते एक प्वाइंट पे सीधी दिखने लग जाती है ।

मजे की बात है कि जब सीधी दिखने लगी तो , अब चाहकर भी उल्टी दिखनी बंद हो गई। 

कमेंटस मे पढा तो देखा कि सभी ने ये बात दर्ज की थी । इसका हल यह था कि वापिस स्क्रोल करके फिर देखो ।😊

आत्मज्ञान भी ऐसा ही है । एक प्वाइंट पर आकर चीजे सीधी दिखने लग जाती है ।फिर इसे वापिस उलटने की चाह ही नही रहती ।

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हसबैंड के मोबाइल मे देखी थी ।संभव हुआ तो यहां शेयर करूंगी ।

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सोमवार, 27 नवंबर 2023

 आज चातुर्मास के बाद गुरुदेवों के सानन्द  विहार हुए। 

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बुधवार, 15 नवंबर 2023

काफी दिन बाद लिखो ना तो फ्लो टूट सा जाता है ।  लिखते जाओ तो ऑउट ऑफ फ्लो हो जाता है ।इसलिए फ्लो का टूटना भी जरूरी लगता है। 😂 . खैर । 
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कल लिखने बैठी तो ऊपर पैरा की पहली लाइन लिखी , आगे कुछ  सूझा नही.... तो.... लेटे हुए नींद लग गई।  
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कल मन मे दुख/विषाद की द्रवशीलता सी थी । .....आज बैटर लग रहा है । पता है , मै तो हमेशा ही अपने मन मे 'ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है ' वाला विषाद महसूस करती हूं । अपने लिए नही ।औरों के लिए।  उनकी अज्ञानता का लेवल देखके । गुरूदेव और महावीर वाणी की कृपा ने मुझे तो बचा लिया ।
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चीजों के बारे मे सोचने बैठो तो कभी लगता है मसला विचार का नही आचार का है ..फिर लगता है ...यह भी नही ...संसार के साधनों को पाने की होड़ मे अपनी क्षमता आजमाने की बात है  ....फिर.....जाने दो , अपने कार्य पे ध्यान रखो ।
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शनिवार, 11 नवंबर 2023

मंगलवार, 7 नवंबर 2023

Sometimes it feels so soothing to read these kind of things .

An extract frm an unfinished story .

कई बार कोई कहानी ऐसे दिख जाती है जैसे सामने टेबल पर रखी हुई कोई चीज़। हम उस कहानी को उठाकर अलटते पलटते हैं कि देखें तो सही यह क्या चीज़ है? 


अरे? 


यह है तो एक पुराने जमाने की चीज़ लगती सब परिवेश पुराना है। किरदार जीवन। जीवन की गति। 


अब ये बातें कहाँ पसंद आएगी किसी को? कहानी का निरीक्षण करते हुए मन से एक आवाज़ आती है। 


तो क्या हुआ? कहानी पुरानी है तो। मनुष्य के भाव और करतूतें तो वही है। कह दो - पुराने साहित्यानुरागी मन से आवाज आती है।


हम दिन भर में कितने ही शब्दों ,आवाजों और छवियों में से गुजरते हैं। एक बार कहीं पढ़ा था कि हमारे ऊपर रोजाना हजारों शब्द गिरते हैं।


 गिरते हैं ! सीरियसली!


बम हैं क्या?


 उस समय इन्कार में मैंने सोचा था।


पर धीरे धीरे मुझे उस बात की गहराई समझ में आयी। मीडिया के जरिए जिंस तेजी के साथ शब्दों, आवाजों और छवियों की रचना बदलती जाती है ,उसमें कब गुड़ को शौकीन व्यक्ति को बंगाल के रसगुल्ले भी फीके लगने लगते हैं, ये पता ही नहीं चलता। 


ऐसे अति चंचल यथार्थ के समय में जब -


मन की गति "सो घोड़े दौड़ रहे हों , एक साथ "


बुद्धि की गति" अपनी दिनचर्या में धंसी हुई हो" 


और शरीर की गति " टल जाये तो टाल दें, नहीं तो आ पड़े काम को किसी तरह निपटा लें बस ", यह हो ;


तब कौन सी बात आपको किस तरह सूझ जाएगी, यह समझना तो लगभग नामुमकिन सा है । फिर यह है कि आपका एक परिवेश ,सोच , रहन- सहन का ढांचा भी है। बेहतर यही है की आप कहानी का मज़ा लें।

रविवार, 5 नवंबर 2023

पॉल्यूशन की ओर से देखें तो मौसम अच्छा नहीं बट काव्य की ओर से देखें तो मौसम झीना झीना , भीना भीना , मां की ममता के आंचल में (चन्द्र वर्ष) अनुशासित-तेजवान पिता (सूर्य )भी प्यार लुटाने पे मजबूर हो जाए,  ऐसा है ।