बुधवार, 31 जुलाई 2024

😔 जाति ना पूछो साधु की 


जाति प्रथा की कठोरताओं के बीच यह एक भारतीय आम सहमति है कि 
अगर एक व्यक्ति साधु के आचार की शुद्धता का पालन कर रहा है तो उसकी जाति न पूछे ।
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 बट ऐसी उच्च भूमि पर भी जटिलताएं होती  हैं ।
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फिर सांसारिक ऊँच -नीच के स्थानों पर तो इसकी भयावहता की कल्पना भी नही की जा सकती ।
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एक बार एक आलोचक की (शायद वे दलित होंगे) टिप्पणी यूं पढ़ी थी कि अगर तुम  रोटी -बेटी का संबन्ध  नही जोड़ते हो तो तुम्हारी प्रगतिशीलता हमारे लिए चूल्हे मे देने लायक है ।

लेकिन यह एक प्रलाप मात्र है ।

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मैने यह भी देखा है कि स्वयं जातिगत भेदभाव का शिकार व्यक्ति दूसरी नीची जातियों प्रति उतना ही कठोर होता है । 

यह एक नेगेटिविटी का दुष्चक्र है । 

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अगर तुम स्वयं को जाति के बंधनों से ऊपर उठा हुआ मानते हो ,तो बाकी लोगों से अपने अलगाव को साफ साफ समझो ।

यह अलगाव सिर्फ विचार का नही , आचरण का भी है तदनुसार कर्म का भी है ।

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जमाना तो पतन का है ही ।
 एक तो समानता और प्रेम के मूल्य पे चलता है और यहां दूसरा उस वितान मे घुसकर ,कब्जा करके उसी की जाति पूछता है ।
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श्री सुंदर मुनि जी म जाट हैं । 

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शनिवार, 27 जुलाई 2024

कल मनीष सिंह की पोस्ट बुद्ध धर्म के बारे मे थी । यह बात जैन धर्म पर भी उतनी ही लागू है । 

प्रतिकार की बात सही है , पर यह भी नही भूलना चाहिए कि महावीर स्वामी जी के सभी 11 प्रधान शिष्य ब्राह्मण थे । 

उन्होने अपने को जाति निरपेक्ष दिखाने के लिए अलग अलग जातियों के लोग शामिल नही किए ।

उनका मार्ग विशुद्ध चेतना की उच्चता का था ।

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मैं फेसबुक आऊंगी, जब दिल करेगा ।

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मंगलवार, 23 जुलाई 2024

जैन संत चातुर्मास शुरु होने के बाद सूई,धागा, रस्सी नही ले सकते ।एक बार एक बच्चा चातुर्मास पर के दौरान रस्सी उठा कर ले गया ।

अब क्या करें ?

मच्छरदानी कैसे लगाएं।

तो हमने घोषणा की ,जो हमारी रस्सी ले गया है देकर जाए। इस तरह रस्सी वापिस आई ।😂

#जैन संतो की अद्भुत चर्या 

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सोमवार, 22 जुलाई 2024

 हर गम ने, हर सितम ने हौसला दिया है।

हमको मिटाने वालो ने हमको बना दिया है।

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चातुर्मास का समय वर्षा ऋतु का होता है । गुरूदेवों की प्रवचन धारा को यूं उपमित करते हैं ।बाहर मेह बरसा , भीतर जिनवाणी का रस बरसा  ।😊

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Forwarded: 

21 जुलाई रविवार सेक्टर 11 रोहिणी दिल्ली 

जिंदगी मुस्कुराई 

जैनाचार्य श्री ज्ञानचंद्र जी महाराज साहब 

हर गम ने, हर सितम ने हौसला दिया है।

हमको मिटाने वालो ने हमको बना दिया है।

चाहे कैसा भी दु:ख हो, परेशानी आ जाए। पीछे हटने की जरूरत नहीं है। हिम्मत रखें जो आपको जिस कारण से मिटाना चाहता है उस कारण को समझो और उसे दूर करने के लिए पुरुषार्थ के साथ दुर्भाग्य मिटाने की आवश्यकता है। मैंने एक फैक्ट्री वाले को देखा। उसका कहना था कि हमारा कंपीटीटर हमें डाउन करने के लिए माल के भाव गिरा रहा है। हमारे बहुत नुकसान हो रहा है। हम क्या करते ? हमने मंगल पाठ सुना दिया। उसने हिम्मत नहीं हारी, उसी आइटम की डिजाइन बदलकर बेचा तो भी नहीं बिका, तीसरा आइटम बनाया वह भी बाजार में नहीं चला, तब परेशान होकर एक छोटी सी फैक्ट्री, एक मशीन का छोटा सा पार्ट बनाया, वो चल पड़ा। वह इतना बिका इतना बिका कि 3 वर्ष में तो उसने बहुत बड़ी मशीन लगा दी, मालामाल हो गया। अतः यह समझने वाली बात है कि हमको मिटाने वालों ने हमको बना दिया।

कंपीटीटर से घबराइये मत। बल्कि कंपीटीटर होना चाहिए, उसी से जागरूकता बढ़ती है। 

आपका व्यवहार नरम हो, विनम्र हो तो ही आप सफल हो पाओगे। 

लोहा नरम होने पर औजार बन जाता है।

सोना नरम होने पर आभूषण बन जाता है ।

मिट्टी नरम होने पर फसल बन जाती है ।

आटा नरम होने पर रोटी बन जाती है ।

इसी प्रकार इंसान नरम होने पर सबकी दिलों पर राज करता है। अतः अपने व्यवहार को नरम और सम्मान पूर्ण बनाओं तो जिंदगी मुस्कुराने लगेगी। 

एक पिता पुत्र में बहुत स्नेह था। पुत्र बाहर से पढ़कर आया, अब पिता पुत्र दोनों जहां भी जाते साथ जाते, साथ खाते, दोनों खुश थे। एक दिन पुत्र का दोस्त मिल गया, उसने कहा नया पिक्चर लगा है, देखने चलते हैं। तो वह बोलता है पिताजी के साथ जाऊंगा। तब दोस्त बोलता है। 

तू बच्चा है क्या जो पिताजी के साथ पिक्चर देखने जाएगा, आजकल तो बच्चे भी नहीं जाते। तू तो बड़ा हो गया, पढ़ लिख लिया लेकिन तेरी बुद्धि विकसित नहीं हुई। ठीक है जा पिताजी के साथ। हम तो अकेले अपनी पत्नी के साथ जाते हैं और दोस्तों के साथ जाते हैं, तभी मजा आता है। ऐसा कहकर वह चला गया। 

अब इसके मन में विचार आया मेरा दोस्त का तो ठीक रहा है, पिताजी के साथ कोई पिक्चर देखा जाता है। अंततः सोचते सोचते उसे पिताजी बंधन लगने लगे और दूसरे दिन प्रणाम करते समय पिताजी को बोल दिया कि मैं अब आपसे अलग रहूंगा, मेरा हिस्सा दे दो। पिताजी समझ गए कि इसका दिमाग खराब हो गया है। पिताजी समझदार थे वह समझ गए। उन्होंने कहा ठीक है कल हिस्सा दे दिया जाएगा। 

पुत्र चला गया। रात भर सोचता रहा की क्या-क्या लेना है। दूसरे दिन पिताजी के सामने जब गया तो पिताजी ने एक स्टांप पेपर पर जितनी भी चल अचल संपत्ति थी सब लिख कर दे दी और उसका मालिक अपने बेटे को बना दिया।

और यही कहा अब तक तो तुम मेरे साथ चलते थे, अब मैं तुम्हारे साथ चलूंगा और बंगले के सर्वेंट रूम में मैं और तेरी माता रह जाएंगे और तुम्हारे यहां नौकरी करेंगे। जब यह स्टांप पेपर पर लिखा हुआ देखा तो पुत्र के मन में विचार आया कि मैंने कैसी बात कह दी पिताजी तो महान है । उसने पिताजी के पैर पकड़ लिए स्टांप पेपर फाड़ करके फेंक दिए और बोला मुझे पैसा नहीं पिता चाहिए। दोनों गले मिल गए और घर में स्वर्ग सी स्थिति आ गई।

इसे कहते हैं जिंदगी मुस्कुराई।  

पहले पिता के साथ रहना अच्छा लगता था। क्योंकि प्रेम था, अब कलियुग के बढ़ते परिवेश में वह बंधन लगने लगा है। माता-पिता का साथ पुत्र पुत्रवधु की स्वच्छंदता पर कंट्रोल करके उनका जीवन बचाता है। इसी तरह गुरु शिष्य पर अनुशासन करके शिष्य का जीवन उन्नत बनाता है। लेकिन आज के युग में न पुत्र, न शिष्य। अनुशासन में रहना परतंत्रता समझते हैं। पिता एवं के साथ रहना सीखें तो ही जिंदगी संवरेगी।

जिंदगी को मुस्कुराते रहने के लिए क्रोध के समय जरा रूक जाओ। गलती की तो थोड़ा झुक जाओ, तो अपने आप सभी तरफ आपको प्रसन्नता के फूल खिलते मिलेंगे।

4 महीने में कुछ न कुछ नियम जरूर करें।

एक राजा के एक ही बेटी थी, राजकुमारी को 64 कला सिखाई। इसके साथ नैतिकता, सदाचार, शील सभी में उच्चता प्राप्त की। जवानी में आने पर भी प्रबल संयम था।

राजा और रानी दोनों अपने-अपने परिचितों के फंक्शन में गए। रानी ने अपनी सहेली के लड़के राजकुमार को पसंदकर उसके साथ अपनी बेटी की शादी की तिथि नक्की कर ली। इधर राजा ने भी अपने दोस्त राजा के लड़के को पसंद कर, अपनी बेटी की वो ही तिथि निश्चित कर दी, निश्चय करके महल में आए। दोनों अपनी अपनी बात कहने लगे और दोनों अड़ गए की शादी मैंने जो निश्चित किया, उसी के साथ होगी, कोई केंसिल करने को तैयार नहीं। दोनों तरफ से तैयारियां प्रारंभ हो गई। जोर शोर से तैयारियां होने लगी। राजकुमारी पर भारी संकट आ गया। उसकी क्या इच्छा है, यह दोनों ही पूछने को तैयार नहीं है।

अब देखिए किसके साथ शादी होती है। वो अगले रविवार को बतलाने का भाव है।

धर्म प्रभावना 

आज आचार्य प्रवर ने चार महीने शील पालने पर जोर दिया। तरह तरह से ब्रह्मचर्य का महत्व बतलाया तो करीब 25 जोड़ों ने प्रवचन में खड़े होकर शीलव्रत नियम 4 महीने के लिए ले लिया। इसी तरह से 24 भाई बहनों ने इसी चातुर्मास में अट्ठाई करने का संकल्प ले लिया। आचार्य प्रवर के समझाने की शैली विशिष्ट है कि हर किसी का मन कुछ भी नियम करने को तैयार हो जाता है।

बीसियों भाइ बहिनों ने चार महीने रात्रि भोजन का त्याग किया। तो 9 भाई बहिनों ने रात्रि में चौविहार रखने का नियम लिया।

इसके अतिरिक्त आचार्य प्रवर ने कच्चे पानी का त्याग कराया, पानी की उपयोग की मर्यादा कराई, पानी की व्यर्थ की हिंसा न हो, टंकी के ओवरफ्लो से गिरते पानी के हिंसा रोकें, भोजन की थाली सामने आने के बाद 1 मिनट भावना भाएं कोई संत मुनिराज पधारे तो दान दूं। उस 1 मिनट के दरमियान 5 नवकार मंत्र का जाप कर लें, आहार बहराते वक्त खाद्य सामग्री के हाथ लगाने से परहेज करें, क्योंकि हाथ के कीटाणु उस पदार्थ के लगकर महाराज को बीमार कर सकतें हैं। हाथ लगाना ही हो तो बर्तन के बाहर लगाने का विवेक रखा जा सकता है। सींक में हाथ मुंह धोती वक्त, पानी को चालू रखने से चार गुणा से अधिक पानी व्यर्थ जाता है, इससे बचें।

सामायिक, प्रतिक्रमण कंठस्थ करें। यह सबसे अधिक जरूरी है।

कीचन में सब्जियां बिखेरे नहीं, कच्चे पानी का उपयोग न हो अन्यथा, उन पर बार बार पैर पड़ने पर हिंसा बढ़ेगी।

उपस्थित सभी बहिनों ने आचार्य प्रवर के निर्देशानुसार यथासंभव अधिक से अधिक नियम लिए।

आज गुरु पूर्णिमा का दिन है। आप भी चार महीने के लिए कोई न कोई नियम लेकर गुरु दक्षिणा देने का ध्यान रखना आवश्यक है। तेला तप की कड़ी चालू हो गई। आज का तेला सुनिता जी जैन, बेला मंजू जी जैन, उपवास पूजा जी जैन शक्ति नगर का रहा।

*28 जुलाई रविवार प्रवचन का विषय मनी प्लांट समय का विशेष ध्यान दें सवेरे 8:30 से 9:00 तक प्रश्न उत्तर प्रतियोगिता और 9:00 बजे से प्रवचन प्रारंभ होना संभावित है। समय रविवार का बदल दिया गया है। विशेष ध्यान लगाए प्रतिदिन का प्रवचन 8:15 से 9:30 बजे तक होना संभावित है।*

श्री अरिहंतमार्गी जैन महासंघ सदा जयवंत हों

गुरुवार, 18 जुलाई 2024

आज गुरूदेव श्री रामप्रसाद जी महाराज की पुण्य तिथि है ।

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सोमवार, 15 जुलाई 2024

हमारे यहाँ श्री ज्ञान चन्द्र जी म सा और जागृति जी म सा का चातुर्मास है । 

20 -7-24 से शुरु होगा ।ऑफिशियली 😊

सब जगह शुरु होंगे ।

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चातुर्मास की शुरुआत की महिमा एक कृषक प्रसंग से यूं बताई जाती है कि सही ऋतु में बीज बोने वाला किसान बाद में पछताता नही , उसी तरह गुरुओं के सानिध्य मे धर्म ध्यान करने वाला भी पछताता नही है । 

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गुरुवार, 11 जुलाई 2024

 मैने 'मेरे धार्मिक विमर्श 'नाम से दो पोस्ट लिखी है । ये पोस्ट उन बौद्धिक असमंजसों के शमन को दिखाती हैं ,जो महावीर वाणी पढ़ने के दौरान हुए। 

मै लिखने लगूं , तो ऐसी सैकड़ो बातें निकल आएंगी । 

बात बौद्धिक सुलझाव की है ,बट उससे पहले श्रद्धा की भी है ,जिसका स्रोत गुरु हैं । 

साथ ही स्वयं के यथाशक्ति तदनुसार आचरण की भी है । शायद तभी वह चित्त विश्रान्ति प्रकट होती है , जिसके बाद कुछ पाने की दौड़ मंद पड़ जाती है ।

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बुधवार, 10 जुलाई 2024

यह सही है कि मुझे आत्मज्ञान संबंधी चर्चा मे संतोष मिलता है ।इस दिशा मे अन्य की रूचि और प्रगति देखकर वास्तव मे मुझे आनन्द मिलता है ।

मेरी स्वयं की धारणा जैन विज्ञप्ति अनुसार स्थिर हो गई है । वर्तमान मे मै श्रावक धर्म पे यथाशक्ति* अनुसार चल रही हूं । इससे आगे प्रगति की संभावना यही है कि मै अपने व्रतों मे और शुद्धता लाऊं ।

बस।

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मोस्टली मै मन की प्रेरणा से ही कार्य कर पाती हूं । 

प्राकृत गोष्ठी पिछले साल हमारे यहां रोहिणी मे ही गुरूदेव के सानिध्य मे हुई थी । तब मै जुड़ नही पाई थी । पहले असमंजस रहा ,कि क्या बौद्धिक तरीकों से इस तरह की चर्चा को समझा जा सकता है । 

बाद मे कुछ मन हुआ तो , व्यवस्थाएं बन चुकी थी । उनमे परिवर्तन संभव नही था । 

अब मेरी धारणा यह है कि बौद्धिक गतिविधियां प्रज्ञा पर जमी धूल को हटाने का काम करती हैं । बाकी तो जिसने जो ग्रहण करना है , वह व्यक्तिगत ही होता  है ।

तो इस तरह अब मै इस गतिविधि से जुड़ी।  

यहां भी कुछ पक्का नही है । मुझे मन से सही लगेगा तो मै जुड़ूंगी । समय की उपलब्धता की बातें भी होती है । एटसेटरा 

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*यह लिखना अति आवश्यक है । क्योंकि भारत देश मे दूसरों के आचरण में  छेद ढूंढने वाले भरे पडे हैं ।

सही बात है । आचार पालन की कोई अंतिम सीमा भी नही है ।

 इसलिए हमने तो पहले ही अपनी शक्ति की सीमा को स्वीकार करते हुए,यथाशक्ति,  कह दिया है ।







यह मेरे द्वारा प्रस्तुत शोध लेख की सिनोप्सिस है । 

उनके यहां से बहुत से विषय सुझाए गए थे । उनमे से किसी एक विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत कर सकते थे । 😊


सोमवार, 8 जुलाई 2024

आज तो धूप चमकीली थी । हवा भी चल रही है इन दिनों ।

गुरूदेवों को साता होगी ।

पीछे कितनी गर्मी हो गयी थी ।

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रविवार, 7 जुलाई 2024

 श्रुत रत्नाकर संस्थान द्वारा तीसरी प्राकृत गोष्ठी का आयोजन गोहाना मे गुरूदेव श्री जय मुनि जी म के यहां कराया जाएगा । तारीख है -28,29,30 अक्टूबर,2024 ।

मैने भी एक रिसर्च पेपर तैयार किया है । 

Let's see wt happens. 

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दीवाली 31 की या 1 नवंबर की है । don't know .

I do things .I don't do things .☺️

यह काम मेरे मन के सबसे नजदीक है ।

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बुधवार, 3 जुलाई 2024

एक बात इस तरह कही जाती है -come under my skin then feel the pain .

हकीकत यह है कि कोई किसी की जगह आ ही नही सकता ।

फिर क्यों कहा गया है यह । क्यों शब्दों को व्यर्थ जाया किया । 

इसलिए कि यह तो संभव नही है कि कोई किसी की जगह आ  सकता है बट यह समझना तो संभव है कि कोई किसी की जगह आ  नही सकता ।

समझ की दुनिया में होने के ये ही लाभ हैं ।

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Lop राहुल गांधी जी की स्पीच मुझे तो अच्छी लगी । इनका नेचुरल स्टाइल एग्रेशन का है ।

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