गुरुवार, 29 फ़रवरी 2024

 अहेतु राग होता है , अहेतु द्वेष भी होता है। कर्म सिद्धांत कहता है अहेतु कुछ भी नही होता। 

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मंगलवार, 27 फ़रवरी 2024

पहले तो कोई रचना छपने के लिए भेजने में मैं  ही तत्पर नही रहती , कहीं भेज दूं तो वापिस हो जाती है ।

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सबसे ईजी है यहाँ शेयर करना । 

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Googling these days .....

Question on Quora: What would make someone want to follow someone around 24/7 and watch everything they do for years? https://www.quora.com/What-would-make-someone-want-to-follow-someone-around-24-7-and-watch-everything-they-do-for-years?ch=15&oid=143534675&share=56cab2cd&srid=3RlexB&target_type=question

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गुरुवार, 22 फ़रवरी 2024

श्री सेठ जी गुरवे नमः

श्री महावीराय नमः

यह  मानस जाप है जो मेरे मन में सतत चलता ही रहता है । 😊

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मंगलवार, 20 फ़रवरी 2024


यह वीडियो कोरोना समय का है ।

कोरोना का समय भी अजीब मनःस्थिति का था । एक तो यह अनजान वायरस था । दूसरे दुनियाभर से आ रही खबरों की वजह से सामूहिक डर,  संशय का माहौल था ।इसने हमारी इन्डियन की पहचान को सक्रिय कर दिया था ।

बहुदा , इन्डियन की पहचान फॉरेन में ही याद /इस्तेमाल आती है ।इन्डिया मे रहते हुए तो कम ही याद रहता है कि हम इन्डियन हैं ।खैर

आज इस वीडियो को यहाँ शेयर किया , इससे जुड़ी एक टेक्निकल बात की चर्चा के लिए। यह विडिओ ऑरिजनल मे ज्यादा एमबी का बना था , वहाट्सअप में चल नही रहा था । बट इसके प्रोग्राम मे यह सुविधा थी कि सेम फाइल के चार-  हेवी टू लाइट - वर्जन  बना सकते थे । 

हमने बाकी घरवालों को दिखाने के लिए लाइट वर्जन फाइल वहाट्सअप पर भेजी और ऑरिजनल वर्जन फेसबुक पर पोस्ट किया था । 

बहुत विस्मय की बात लगी थी उस समय , कि किसी ने प्रॉब्लम को पहले ही सोचकर साॅल्व किया हुआ था ।😊

विडिओ बनाने का आइडिया छोटी बहन का था ।

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शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2024

मिलने के प्रसंग अब तक दो हुए थे ,दोनों फुस्स। 

तीसरे में , सिर्फ अनुराधा से कुछ बात हुई थी । मैं भी बहुत चुप रहती हूं । मुझसे बोला नही जाता ।

i am very bad at these things .

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बुधवार, 14 फ़रवरी 2024

 I hv felt that rahul gandhi ji has a genuine liking of people. 

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ये तस्वीर क्या कहती है ?


शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2024

 कल भगवती जी पढ़कर पूरा हुआ।  बहुत संतोषजनक था ।  बट एक बात की ग्लानि थी कि मै सब बातों को समझने मे सक्षम क्यों  नही हूं ।

अदरवाइज़ -

 जैन आगमों को पढना बहुत बड़ा सौभाग्य-हजार भाग्य -लाख भाग्य-करोड़ भाग्य -करोड़ करोड़ भाग्य है ।🥳🥳🥳🥳🥳💃🕺💃🕺💃💃💃💃नाचो नाचो ।

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गुरुवार, 8 फ़रवरी 2024

 पता है , मुझे तो मौसम की बढ़ियापन भी वशीभूत कर लेता है । ऐसी बहुत सी बातें होती हैं ,जो लगता है , कहनी चाहिए।लिख भी लेती हूं ।   बट ,साफ -सुथरा मौसम देखकर मन बदल जाता है । 

छोड़ो! ऐसी बढ़िया धूप मे क्या कहना । 😊

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रविवार, 4 फ़रवरी 2024

 श्रेष्ठ रचनात्मक कला का यह एक अनिवार्य प्रकार्य मैंने देखा है की वह आस्वादी के भीतर कुछ बदल देता है। बेशक फौरी तौर पर वह स्वयं उस तरह की रचना न कर सके, पर धीरे -धीरे परिपक्वता पूर्ण होने पर वह स्वयं भी इस तरह की रचना करने के काबिल बन जाता है।

 खुद मेरे साथ यह हुआ है । अब तक , तीन बार।  सुधा अरोड़ा जी की  कहानी है-  औरत : तीन बटा चार । यह कहानी मैंने कई बार पढ़ी है । पढ़ी,पढ़ी, पढ़ी । पता नही क्या ट्रिगर हुआ । पोशाक कहानी क्लिक हो गई।  

जैन आगम 'उववाई ' के ' रिच' भावपूर्ण वर्णन पढ़ते हुए मुझे नाते मे बड़ी बहन की शादी के मंजर याद हो आए थे । मैने उन्हे एक कहानी मे लिखने की कोशिश की थी । बट सही फार्म नही मिली थी । 

ऐसा होता है ना!  कि लाइफ मे एक मोमेंट पर आपने बातों को कैसे समझा-जिया , बाद मे परिवर्तित जानकारी मे उन पिछली बातों का भी स्वाद बदल गया ।तो चीजे काम्प्लेक्स हो गई। बट फिर भी आप पाते हो कि उस पिछले समय मे जिस तरह बाते देखी थी , उनका मजा विलक्षण था ।

तीसरी बार ऐसा हुआ। मैं पत्रकार रवीश कुमार* के एफबी को फॉलो करती हूँ। उन्होने अपनी टाइमलाइन पर सॉन्ग शेयर किया था ।यह  एक अंग्रेजी गाने का लिंक था। वह गाना था- फ़िल्म साउन्ड ऑफ म्यूजिक का दीज़ आर् माई फ्यू फ़ेवरेट थिंग्स। इस गाने की एनर्जी इतनी जीवंत और तुरंत फैलने वाली थी कि मेरा मन बहुत खुश हो गया था। इस गाने की वजह से, मैं भी अपने बचपन में पहुँच गई थी।

बाद में मैंने उसे एक कहानी में ढालने की कोशिश की, पर वह बात नहीं बन पा रही थी। फिर वही समस्या।  मनचाही फॉर्म नहीं मिल रही थी। मुझे लगता है , अब जाकर वह समस्या सॉल्व हुई है। देखो ! आगे क्या सामने आता है।

 *  लेखन में प्रसिद्ध लोगों का जिक्र करना अनुकूलता -प्रतिकूलता के पैमाने पर देखा जाता है।

अनुकूलता है तो, यह बात प्रसन्नता की लगती है।

प्रतिकूलता है तो , यह बात 'हमारी प्रसिद्धि में जबरन शेयर लेना चाह रहे हैं ' इस टाइप से निकल कर आती है। 

मैं इस बात को तथ्य के तौर पर दर्ज करती हूँ। और इस तथ्य के द्वारा रचनात्मक अनुभव की प्रक्रिया पर भी कुछ रौशनी डल जाती है।

यहाँ ब्लाग पर प्राइवेटली इस बात को इस तरह लिखने में तो मुझे लगता है कि यह दोष नहीं लगेगा। अगर कभी इस बात को प्रकाशन में कहने का अवसर आया तो फिर यह बात कैसे कही जाएगी,  जब की तब देखेंगे ।

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शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2024

रचनात्मक कला का यह गुण होता है कि इसके आस्वाद के भीतर में सम्मोहन, विस्मय, आह्लाद , चमत्कृति का भाव पैदा होता है।

हाय!  मैं तो देखकर , खड़ी की खड़ी रह गई/गया टाइप ।

चाहे कोई गीत हो, नृत्य हो, मूर्ति हो या लेखन। सुशोभित की नव-वधु पोस्ट ऐसी ही थी । आजकल इंडिया में तो क्रान्ति आई हुई है । इतना कन्टेन्ट बनाया जा रहा है , लिखा जा रहा है ,फैशन इंडस्ट्री में ।बेहिसाब ।

बहुत साल पहले की बात है । मसूरी के माल रोड पे, चौंक पर  हमने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वालों स्त्री- पुरुषों की मूर्तियां लगी देखी थी । ।आम स्त्री-पुरुषों की ।  एक या दो स्त्री है और कुछ पुरुष हैं । वे हँस रहे हैं , खिलखिला रहे हैं।ऐसा लगता था कि वे अपनी पार्थिव देह के भीतर किसी अपार्थिव आनन्द का अनुभव कर रहे हैं । (इन्टरनेट पे मिल जाएगी )

बहुत ही अच्छा महसूस हुआ था उन्हें देखकर।

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पहले मै आश्चर्यचकित होती थी ,पेन्टिंग वगैरह की ऊंची कीमतें पढ़कर। 

पर अब मुझे आश्चर्य नही होता । पेन्टिंग में दिखाया गया कोई रूप संयोजन किसी इन्सान के लिए उसकी भाव -अवस्था का बोध कराने का चिन्ह है । यह एक आश्वासन भी है कि उस तरह फील करने वाला , वह अकेला नहीं है ।

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रवीश सर का भोजपुरी गानों पर विडिओ अच्छा लगा। 

मुझे इस तरह का कन्टेन्ट शायद इसलिए पसंद आता है कि मैने कस्बा लाइफ के बाद ,शहरी जिन्दगी से होते हुए , धर्म-दर्शन के परिचय की वजह से एक मुकम्मल भाव यात्रा सम्पन्न की है । इसलिए विभिन्न भाव बोध की गहराई को मै समझ पाती हूं । 

शायद कुछ लिखूं । अभी तो मेरा मन मुरझाया हुआ है ।

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गुरुवार, 1 फ़रवरी 2024

 https://www.facebook.com/MakeupLessons.O/videos/703343541775913/

Some work on sculpture painting. Happen to see few days ago.