शुक्रवार, 30 अगस्त 2024

मैं जब भी बीमार होती हूं ,लगता है निकलने का टाइम आ लिया ।
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मंगलवार, 27 अगस्त 2024

कितने उत्तम मुनिराज हैं सब । श्री ज्ञान चन्द्र जी म सा आदि ठाणे - 5 । 

एक तारीख से पर्युषण पर्व लग रहे हैं । 

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रविवार, 25 अगस्त 2024

आज मौसम खिला- खिला है । लगता है सितम्बर आ गया है।

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शुक्रवार, 23 अगस्त 2024

कल की पोस्ट की पुनः समीक्षा -

एक बहुत बड़ा गैप होता है ,इन्सान की समझ और चाहत में । शास्त्रीय भाषा में ज्ञान और काम-भोग कहा गया है ।

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बचपन अवस्था में ,जब स्वयं की चाहतें मिनिमम होती हैं , तब ज्ञान सीखना बोझ नही होता । आपने देखा होगा बच्चे कैसे मजे मजे में लम्बे लम्बे पाठ याद करके सुना देते हैं ।

मुझे खूब शौक था -कैलीग्राफी का, कढ़ाई वगैरह का ।

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जब बड़े होते हैं ,तब झमेला शुरु होता है ।

अच्छा!यह झमेला भी है , अपनी क्षमता की आजमाइश भी है ।

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शांति तब प्रकट होती है जब इंसान इस गैप को भरने की काॅर्ड सेट कर लेता है ।

यह आत्म-संयम से ही संभव होता है । 

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गुरुवार, 22 अगस्त 2024

कल की पोस्ट की समीक्षा -

यह भी मेरे लिखने की शैली का एक आयाम है । यूं तो ऐसे मौके कम आते हैं ;  जब पोस्ट लिखकर कोई महत्वपूर्ण बात क्लिक कर जाती है ।उसे मै अगले दिन दर्ज कर देती हूं।

छन्द अनुशासन वगैरह का ज्ञान काव्य शास्त्र के अन्तर्गत आता है। यह सब अब पॉपुलर ज्ञान की श्रेणी मे नही आते ।

मैं देखती हूं ज्ञान का बहुत हिस्सा प्रायः एक व्यापक निगलेक्ट का शिकार है । इनसे जुड़े लोग 'बचाने' की आत्म-शांति विनाशिनी चिंता से ग्रस्त रहते हैं । धर्म वालों का भी यही हाल है ।

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एक ओर दुनिया में/सब जगह में अशान्ति बढ़ रही है , दूसरी ओर .....

पता नही काॅर्ड कहाँ मिसिंग है ।

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बुधवार, 21 अगस्त 2024

हमारे यहाँ गुरुदेवों के सानिध्य मे उत्तराध्ययन के अध्ययन याद कराने का प्रोग्राम चल रहा है । मुझे 25वां अध्ययन मिला है । इसमें 45 गाथाएं हैं ।

गुरुदेव रामप्रसाद जी म फरमाते थे -संस्कृत में श्लोक और प्राकृत में गाथा ।गाथा प्राकृत का अपना छन्द है ।

मुझे  छन्द अनुशासन का ज्ञान नही है । जैन आगमों का अध्ययन छन्द की दृष्टि से भी हो सकता है ।

अभी तो याद करनी शुरू की हैं । सारी कच्ची हैं । ऐसा लगता है वापिस बच्ची हो गई हूं । 

याद करना ।सुनाना ।😊

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That's how I hv always been like .

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कम से कम शब्दों में अपनी बात कहना ,  प्राकृत में यह गुण कमाल का है । 

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रविवार, 18 अगस्त 2024

कल लिखा था । पोस्ट करने से पहले ही झपकी लग गई।  बाद में किया नही । 

पहले क्षोभ था ,आज पढ़कर हँसी आ रही है । पर क्षोभ हो या हँसी ट्रूथ रीमेन्स द सेम ।

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लेखकों के सतत क्लेश 

  • किताब नही छपी तो 'इसका कुछ काम ही नही है '।
  • जिसकी ज्यादा छपी है 'रद्दी मे बेचकर भी कमाई हो जाएगी ।
  • 'इस पर' बोले ,'उस पर' क्यों नही बोले ।
  • सिर्फ बोलते हो कुछ करते क्यों नही -एक्टिविज्म की मांग ।
  • जो थोड़े बहुत एक्टिविस्ट है ,ये तो बडी गेम मे है ।
  • विवाद मे खींचने का ट्रैप 'विवादास्पद मुद्दो पर राय बताइये । ओरगैज्म ,एलजीबीटी एटसेटरा। 
  • लेखन/साहित्यिक चोरी ऐसी गुप्त विद्या है जिसे पकड़ पाना और साबित कर पाना तो नामुमकिन ही है ।
  • बड़े से बड़े सत्ताधीश को ललकारने वाले , पर सम्पादक के आगे घिग्घि बन जाती है ।
  • बहुतों ने तो टाइपिंग को ही लेखन मान लिया है ।
  • इधर की मलाई खा ली , उधर की भी -यह कटाक्ष बहुत मारते हैं ।
  • सत्ता का पिछलग्गू -यह भी जाना -माना ताना है ।
दम्भी , दुर्विनीत, प्रशंसा के लोलुप, आत्मप्रशंसक, सतत क्लेश प्रिय ,उथले ,छिछले , असमाधि मन ,

ऐसा व्यक्ति अगर एक ही झेलना पड़े तो निबाह मुश्किल , आत्मीय दायरे मे पल्ले पड़ जाए तो नरक है , 
फिर अपरिचितों के समूह को कौन समझे ।
# observations 
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 इन्हें यह अहसास तक नही है कि ये कितने vulnerable हैं ।इन्हें इस नहीं तो -उस  , मुद्दे  पर भड़काना कितना आसान है ।

एक किताब के प्रसंग मे ही देखें , देखते ही देखते एक कमेंट के विरोध पर समूह मे ऐसी लिंच की प्यास हावी हो गई कि फिर किताब के कॉन्ट्रैक्ट के खत्म होने पर ही शान्त हुई । 
किसी का क्या बिगड़ा। 
लेखक लड़ता रहा । आर्थिक नुकसान झेला, वो अलग ।
फिर सब शांत ।
सब पुनः अपनी रवानी में ।

अएं ...

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क्या कोई मिनिमम अहिंसा रूल है , जिसे सब फाॅलो करते है ।
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अगर दर्शन दुरस्त नही है  ,तो यूं ही आए -गए होता रहेगा।
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शुक्रवार, 16 अगस्त 2024

भावना भी नही , भावना पर  सिर्फ श्रद्धा भी इतनी चमत्कारिक और शक्तिशाली और रक्षक होती है ,

फिर उस मार्ग पर चलना तो अवश्य सुख शांतिदायक है ।

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बाकी शब्दों के गैप को समझना अपनी खुद की जिम्मदारी है । 

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भावना एटसेटरा शब्दों को जितना चाहे ,उतना भ्रष्ट किया जा सकता है ।#अनुभव ज्ञान 

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लोगों के जीवन में प्रेम 

और

 मेरे अध्ययन मे आगम ज्ञान की भांति 

चर्चाओं मे तिरंगा कब आ गया ,पता ही नही चला ।😂

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यू ट्यूब भी स्रोत है लेखको की कमाई का । लेखक विंग, विमर्श विंग, दर्शन विंग एटसेटरा । 

पर सबसे पहली बात है क्षुद्रता का त्याग। 

लेने का नही ,देने का भाव।

हरेक लेखक एक विशाल लेखन परम्परा के बीच का बुलबुला है। अपने होने की अमरता का इतना मान ही काफी है ।

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बात ऐसे शुरु हुई थी कि लेखकों के गोष्ठी स्थल सूने क्यूं हैं । अन्यथा न लेना,  क्षुद्रताएं देखकर लगता है ;जितनी पूछ है , सो भी ज्यादा ही है । 

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मैं तो बहुत शिद्दत से इस जरुरत को महसूस करती हूं कि लेखकों की किसी टीम से पहले ,

लेखकों से सावधान रहें ।

अपनी समझ के जिम्मेदार आप खुद हैं ।

ये बौनी समझ के देवता हैं ।

टाइप एडवाइजरी पहले प्रचलित की जानी चाहिए। 

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महावीर स्वामी जी सबकी रक्षा करें ।

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बुधवार, 14 अगस्त 2024

4

In life , ppl fall in love and they do not know when did it happen ,

Similarly I became conscious of aagam knowledge without knowing it . 

I can point the moments , bt how did it happen is unexplainable. 

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जैन आगमो के अध्ययन ने मेरी दृष्टि को बदल दिया है । 

अब मेरे जीवन में चीजों का वरीयता क्रम यह है - कामना( धन , मुझे प्रसिद्धि की कभी कामना नही रही । )<भावना (प्रेम<परिवार<देश<गुरु-धर्म*)<विमर्श < सम्यक दर्शन <देश विरति श्रावक चारित्र। 

सच्चे सुख के आकांक्षी व्यक्ति के जीवन का यही वरीयता क्रम होना चाहिए। यह भूमिका बुद्धिजीवी वर्ग निभा सकता है । बट वहां तो आपस की जलन ,होड़ का ही आर-पार नही है ।खैर

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पहले इस क्रम में कुछ उल्ट -फेर थी । मैं भावना को सर्वाधिक महत्व देती थी । 

पर अनुभवों ने दिखाया कि चीजें वैसी नही होती , जैसी वे दिखती है 

।बट जो हुआ है बहुत शुभ हुआ है।

यह क्रम महावीर वाणी ने ही सीधा किया है ।

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मैने यह भी देखा है कि ज्यादातर लोगों के जीवन मे यह क्रम > इस निशान का होता है । इसमे आमजन तो हैं ही , बुद्धिजीवी भी आ जाते है ।

ऐसे लोगों को मेरी स्लो मोशन की बातें प्रवचन लग सकती हैं ।

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मैं कोई संघर्ष महसूस नही करती । बल्कि मुझे तो लगता है महावीर स्वामी जी की कृपा से सभी संघर्ष समाप्त हो गए हैं  । चीजें जब होंगी , तब होंगी। 

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*मेरा देश प्रेम का नजरिया भी धर्म से प्रेम का फल है ।देश प्रेम की सोच एक सीमा के भीतर के मनुष्यों तक है ।धर्म की सोच में सभी जीवित प्राणी आ जाते हैं ।

जिसमे सबसे बढ़कर,  जैन धर्म मे तो छ जीवनिकाय की अहिंसा तक बात गई है ।

 


मंगलवार, 13 अगस्त 2024

3

Sonam kapoor was the one ,who fought 'nepo kid' attack brilliantly .

Nowadays 'they almost made me feel apologetic of being daughter of my father ' is the repeated answer of her  , spoken at most platforms. 

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Aishwarya's puple lipstic at cannes .

The woman smashed years long labour of so many designers, their assistants, supporting staff, imagination, fabric selection, design selection, colors ,cuts ......and money ....

In one go ...

By wearing a purple lipstick and taking all headlines of media(at least of Indian side)to her side .

Who can question the sharpness and brilliance of a woman.

Defeated Sonam could only say - she succeeded in her effort.

I felt sorry for sonam bt what could anyone do . That's how their world goes.

Years later urvashi tried to copy her. Bt magic doesn't repeat itself.

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I hv given here two instances to show how keenly and passionately I used to follow things 😊. 

So it was not , only aagam that I hv read.

Bollywood news is a very sought-after thing in india  .anyway.

Those were years of 2012,13,14 . may be more .

Cont..

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सोमवार, 12 अगस्त 2024




अपनी इसी तरह की डायरी के लिए गुलजार ने हामिला शब्द का प्रयोग किया है।  

Honestly I didn't like the expression bt that's how things go in world.
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Earlier I used to find pleasure in seeing men working on construction sites.

Oh !what coordination , hard work , precision, sweat . 

And no sorrow at all . Smilingly they do all work.

 (We are living in Delhi for 35 years and more . And rohini ,pitampura and Shalimar bagh are quite new areas . Lot of construction keep on going here . Anyway)

Women also do work on these sites ,their work is only of labour kind . No mind application.

 ( the picture is quiet changed now . I know women who do carpenter/interior designer work.

 Here , women applies mind and men execute. 

I suppose india is witnessing a silent revolution in terms of working women force . )

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Later I recognize men efforts in many fields . Music ,art, sports , business,  politics, creating knowledge , science etc . 

And no recalling,  I was astonished to the depths of my being .

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ऐसा कहते हैं कि यह संसार माया चलाती है अर्थात स्त्रियां।

 एक अपेक्षा से यह बात सही हो सकती है कि पुरुष यह सब महिलाओं के लिए करते हैं ,

दूसरी अपेक्षा से देखो तो , ये सब काम करते तो पुरुष ही हैं । अतः संसार को चलाता तो उनका ज्ञान ही है ।

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I hv a diary where I hv written notes or Sometimes pasted newspaper(mostly bollywood news) cuttings on my reading and understanding of things. 

That diary is of zero value to me now.

Contd...



रविवार, 11 अगस्त 2024

 There are many men writers who are known to give words to women pain correctly.

For example-I hv find pain of upper household's women in rabindra naths literature written very well .

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I don't know about myself .

Bt I hv been very curious to see men working .

Most times I feel good .

I feel astonished to see their capacity , in particular. 

To see their joy in working, to see them facing challenges etc

And then 

Their naivety,  frustration etc

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What I hv find , that all men are driven by a very great sense,  to prove themselves. 

A certain kind of ego.

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 this feeling of ego is necessary to an extent, that this is the driving force in men .

Bt after certain limit , this force becomes , a hindrance in actual solution of things .

Only men of great learning can overcome the effects of these forces .

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#observations 



मंगलवार, 6 अगस्त 2024

In continuation with previous post - 

 मेरे तो पेट मे गुडगुड सी हो जाती है । संदेहवाद एटसेटरा सुनकर। 

शायद इसीलिए कहा गया है कि एक हद के बाद विद्वता बोझ हो जाती है ।

गुरूदेव रामप्रसाद जी म एक शेर सुनाते थे - 

गुजर जा अक्ल से आगे कि

 ये नूर  , चिरागे राह है मंजिल नही ।😊

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Belated friends day to all on fb . Here I feel peace . There , I hv many relatives also + likes ki problem. 

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जिसे हम सुनहरी सांझ मे छोड़कर जाना कहते हैं , उसी को शास्त्रीय भाषा मे मर्यादा कहते हैं ।

खाली समझ की बात है । 

यूं भी कोई सदा के लिए राज नही कर सकता । 

इस समझ को पहले ही ज्ञान के अभ्यास से प्राप्त कर लेना , पंडित  होने का लक्षण है ।

#मनीष सिंह की पोस्ट पढ़कर 

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श्रावक के पांचवे व्रत 'परिग्रह परिमाण व्रत ' के पालन की तीन तरतमता-

जघन्य -कम से कम -  अभी है नही । पर मेरे पास अमुक धन हो ,तो उससे आगे के परिग्रह का त्याग ।

मध्यम - बीच की अवस्था - जितना मेरे पास धन है , उससे आगे के परिग्रह का त्याग ।

उत्कृष्ट- उत्तम- जितना मेरे पास धन है , वह मेरी आवश्यकता से ज्यादा है । जरुरत अनुसार, रखकर  बाकी का त्याग। 

 - प्रवचन अंश - गुरूदेव श्री ज्ञान मुनि जी म - 5.8.24 sector 11 rohini.

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A child in a candy shop - had that feeling seeing yesterday's rahul gandhi ji's video of jaitram cobbler meeting. 

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शनिवार, 3 अगस्त 2024

Some notes on video on jain Darshan by vikas divykirti.

Time : 

2:37  -    आस्तिक  की व्याख्या - अस्ति अर्थात है । नास्तिक अर्थात  नही है । आस्तिक को नास्तिक नही किया जा सकता । नास्तिक को आस्तिक नही किया जा सकता ।

वे कौन सी चीजें हैं ,जो हैं -जीव ,अजीव आदि तत्व। 

जीव को अजीव नही किया जा सकता ।अजीव को जीव नही किया जा सकता । 

तीर्थंकर की शक्ति भी ये नही कर सकती ।

जैन दर्शन पुरुषार्थवाद का दर्शन है । पर मनुष्य का पुरुषार्थ भी नास्ति  को आस्ति नही कर सकता ।

1 : 03 :_  -आत्मा का आकार ही नही ,वजन भी पूछा गया है । यह विषय राजप्रश्नीय सूत्र मे आए हैं ।😊

1:22:_  - भीष्म साहनी के नाटक हानूश का यह सार है कि पहली घड़ी बनाने मे समय लगता है । बाद मे , उस जैसी तैयार करने मे समय नही लगता ।

कुछ इसी तरह का अंतर है -तीर्थंकर और सामान्य केवली में । 

तीर्थंकर अतिशयों से युक्त विशिष्ट ज्ञानी होते हैं जो कैवल्य प्रकट होने के बाद अन्यों के लिए भी सहायक होते है ।

दोनों के ज्ञान मे अंतर नही होता , उपकार की दृष्टि से उन का पूजातिशय अधिक होता है ।

1 :22:_ -  सिद्धशिला लोकाकाश के भीतर ही है ।  

अलोकाकाश मे तो धर्मास्तिकाय द्रव्य न होने के कारण वहां जीव की गति ही नही है ।

1 :28 :_ - ज्ञान के प्रकार आदि -ये नन्दी सूत्र के विषय हैं।

1:52:_ - तीन वाद का विश्लेषण अच्छा लगा ।

संदेहवाद और अज्ञेयवाद सुनना तो लगभग हौलनाक (anxiety-full) था । अपनी -अपनी तबीयत की बात है । इस तरह की स्थिति मे बंदा गति कैसे करेगा । 

Feels like black hole types. I get choke in these types of talks .

फिर स्याद्वाद ही सही है । वह श्योर नही है । संदेह भी होंगे । अज्ञेय को भी समझता है ,पर अपनी जानकारी के मुताबिक चल तो रहा है ।

2: 44:_ - कैवल्य का लोभ भी तो लोभ है । उत्तर सही था । शास्त्रीय शब्दावली है -यह प्रशस्त राग है ।

लोभ की स्थिति तो 12 वें गुणस्थान तक रहती है ।

मुक्ति और ध्यान  में क्लैरिटी नही थी ।

3:07:_ - संथारा का विषय बौद्धिकों मे सबसे ज्यादा न समझा गया  विषय है ।

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कुल मिलाकर अच्छा लगा । यह विडिओ सुनते हुए रिअलाइज हुआ कि जाने -पहचाने शब्दों और विषयों का भी राग होता है ।

# While I am not well . 

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Now only one month is left to rains . phuhh

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