सोमवार, 10 अक्टूबर 2016

पिछली कहानी के असली पाठक 7 से 12 वी तक के बच्चे हैं |
यह कहानी परिपक्व रूचि के पाठकों के लिए है , बौद्धिक अभिरुचि के पाठकों के लिए  |इस तरह की कहानियां थोड़ी हैवी होती हैं |
यह genre पर्सनली मुझे भी कम पसंद है |पर मैं बौद्धिकता को त्याज्य भी नहीं मानती |आज के जीवन के संक्लेशों को समझने के लिए बौद्धिक निर्ममता जरुरी है |उसी से साहित्य में धार बनती है |
स्त्री पुरुष के रिश्ते में महत्वकांक्षाओं का होना स्वाभाविक सा लगता है |पर जब महत्वकांक्षाएं रिश्ते को ख़त्म करने लगें तो .......
कहानी तो बनती है |enjoy reading 

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