कांग्रेस का 70 साल -बेमिसाल टीजर अच्छा है ।
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धातकी खंड के वासुदेव ने समुद्र मार्ग से जाते हुए जम्बू द्वीप के वासुदेव की पताका देखी । उसने अपना शंख फूंका। बदले मे दूसरे वासुदेव ने भी अपना शंख फूंका । इस तरह शंख ध्वनि के माध्यम से उन्होने एक दूसरे के होने को जान लिया और वे प्रसन्न हुए। यह इस अवसर्पिणी काल के दस आश्चर्य में से एक है ।
यह लिखते हुए सोच रही थी कि क्यूं लिख रही हूं । बट फिर सोचा कि लिख देती हूं । यह प्रसंग मुझे भाव के 'अद्भुत ' की वजह से बहुत पसंद हैं । सचमुच कैसी- कैसी बातें होती हैं दुनिया मे ।
यह एक बात है शेयर करने योग्य। बाकी कौन सी चीज कैसे सम्पन्न होती है , हम नही जानते ।
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