ए टेल ऑफ कॉवर्ड हिंदी सेंटीमेंट्स
भाषा व्यक्ति की निजी सांस्कृतिक सुरक्षा है |
संवाद -१ पिता - तू हरियाणवी मत बोला कर
लड़की - क्यूँ ?
पिता - गवारु लगती है
कसमसाई हुई सी लड़की फिर भी नहीं मानती ।
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महानगर में बीस सालों में इस बीच पिता ने बेटियों को घर से भागते देखा, बहुयों को पीहर मैं बैठे देखा, कोर्ट - कचहरियों मैं तलाक होते देखे |
संवाद -२ शादी शुदा लड़की पीहर मैं आकर बोली-माँ री, तू कित सै ?
सुनकर पिता की आखें संतोष से चमक गयीं | जाने-पहचाने शब्दों की गंध से मन भर गया | बूढी भाषा ने कायर बेटे को बचा लिया था
महानगर में बीस सालों में इस बीच पिता ने बेटियों को घर से भागते देखा, बहुयों को पीहर मैं बैठे देखा, कोर्ट - कचहरियों मैं तलाक होते देखे |
संवाद -२ शादी शुदा लड़की पीहर मैं आकर बोली-माँ री, तू कित सै ?
सुनकर पिता की आखें संतोष से चमक गयीं | जाने-पहचाने शब्दों की गंध से मन भर गया | बूढी भाषा ने कायर बेटे को बचा लिया था
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