गुरुवार, 15 सितंबर 2016

kuchh batein

 रेला -मेला बीत जाने पर खर्चे का हिसाब लगाना किसे अच्छा लगता है ?सचमुच ऐसी बातें न कहने में अच्छी लगती हैं न सुनने में। मूड ख़राब हो जाता है ?किसी शायर ने कहा है -
तआरुफ़ रोग बन जाए तो उसको छोड़ना अच्छा
तआल्लुक बोझ बन जाए तो उसको भूलना बेहतर
वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा
तो दोस्तों ,अपने अफ़साने को एक खूबसूरत मोड़ देते है। अब तक मैंने ५-६ कहानियां लिखी हैं। एक टी वी  सीरियल की स्क्रिप्ट लिखी है। और दो फिल्मों का आइडिया है।
लेखन कभी मेरे दिमाग में भी नहीं था। इस सारे परिदृश्य की ओर मैं सिर्फ और सिर्फ इस बात से उन्मुख हुई कि विशाल हिंदी प्रदेश की साहित्यिक उपलब्धियां इतनी नगण्य क्यों हैं?
क्या कमी है हमारी सोच में ,हमारे कहानी कहने के तरीके में।
खैर
बात कहानियों से शुरू हुई थी। अब मैं अपनी लिखी कुछ कहानियां शेयर करुँगी। अभी टाइप नहीं की हैं ,जैसे जैसे करती जाऊंगी ,शेयर कर दूंगी।

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