गुरुवार, 18 अप्रैल 2024

विकास दिव्यकीर्ति के इंटरव्यू में उन्होंने 'इंग्लिश कैसे सीखी' इस बारे में बताया है। कि ' वह गया'  को इंग्लिश में बताने के लिए सेकंड फॉर्म ऑफ वर्ब लगाने हैं। 10 साल की स्कूली शिक्षा में उन्हें अभी तक यह बात समझ नहीं आई। जब समझ में आयी, तब इंग्लिश भी  समझ में आ गई।

कुछ इसी तरह की कहानी मेरी भी है। हमें नाइन्थ - टेंथ क्लास में जिस टीचर ने इंग्लिश सिखाई , उन्होंने 2 साल में ही सारी इंग्लिश ग्रामर क्लियर कर दी ।

 इंग्लिश में मेरी बारहवीं क्लास में डिस्टिंक्शन है।

 बीए पास कोर्स में इंग्लिश कोर्स तो सभी पढ़ते है। एक्स्ट्रा सब्जेक्ट में मेरे पास इंग्लिश इलेक्टिव भी था। यह कोर्स ऑनर्स से एक डिग्री कम माना जाता है । इसमें थर्ड ईयर में सेक्शन में फर्स्ट आने पर मुझे इनाम भी मिला है।

 बाद में मैंने एम ए  में हिंदी ली थी। और उसके बाद कॉन्शियसली मैंने हिंदी का प्रयोग ज्यादा करना शुरू कर दिया। हिंदी में ही मुझे मज़ा आने लगा था। 

भाषा अभ्यास की बात होती है ।

इससे रिलेटेड मैंने एक कहानी लिखी थी 'इंग्लिश के जिंदल सर' । वह छपने के लिए भेजी तो संपादक ने इस टिप्पणी के साथ छापने से इनकार कर दिया कि हम स्टूडेंट्स को मारने वाले शिक्षकों को  प्रोत्साहित नहीं कर सकते । 

खैर । इस बात पर तो मुझे कुछ नहीं कहना । सब की अपनी संपादकीय नीति होती है। वे अपनी योजना के तहत क्या छापे,क्या नहीं  , यह तो उनका अधिकार है। 

 यह इंग्लिश को सीखने के प्रोसीजर्स  की कहानी थी। हमारे देश में आज भी ऐसे बहुत से छात्र हैं जिनके लिए इंग्लिश सीखना एक चुनौती है । तो उन बच्चों तक ऐसी कहानियाँ पहुंचे तो उन्हें अवश्य कॉन्फिडेंस प्राप्त होगा कि इंग्लिश सीखना कोई पहाड़ चढ़ने जैसा मुश्किल कार्य नहीं है ।

इस मंशा को साथ ही मैंने यह कहानी लिखी थी।यह उस अद्भुत टीचर के प्रति मेरी ट्रिब्यूट भी थी । इस कहानी का बहुत बड़ा हिस्सा टीचिंग के क्षेत्र में प्रयोग को लेकर है। 

#how things come out 😊

#how when whole world wants you to feel low , u meet ppl who are doing their job silently , without expecting any reward or words of thanks. 😊


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