समवसरण
क्रियावादी = जीव अजीव पाप पुण्य आस्रव संवर बन्ध निर्जरा तप मोक्ष = 9 ×2 स्व-पर = 18×10 नित्य -अनित्य अर्थात काल, नियति ,ईश्वर, स्वभाव, आत्मा = 5×2 =10 । 18×10=180
अक्रियावादी
जीव अजीव आस्रव संवर बन्ध निर्जरा तप मोक्ष = 7 ×2 स्व-पर = 14×12 नित्य -अनित्य अर्थात काल, + यदृच्छा , नियति ,ईश्वर, स्वभाव, आत्मा = 6×2 =12 । 14×12= 84
अज्ञानवादी
9 ×7 =63
7=सद असत सदसत अवक्तव्य सद् -अवक्तव्य असद- अवक्तव्य, सद-असद-अवक्तव्य
विनयवादी
देव ,राजा ,यति ,ज्ञाति ,स्थविर ,अधम ,माता पिता =8 ×4 मन,वचन,काय,दान = 36
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जैन दर्शन में ये चार तरह के दार्शनिक बताए गए हैं ।
-सुशोभित की पोस्ट पढ़कर
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