मंगलवार, 24 सितंबर 2024

ऐसा सुनते थे कि पॉलिटिशियन्स होने के लिए गैंडे की खाल होनी चाहिए , तभी आप सर्वाइव करते हो ।

विरोधियों के प्रहार का तो पता नहीं , बट लोगों की दर्दनाक बातें देखकर ये अवश्य लगता है कि उनका दिल भी जरूर  गैंडे की खाल जैसा अति कड़ा होना चाहिए,  नहीं तो आप कैसे सर्वाइव करते हो ।

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ब्रूटल आलोचना के समय में लोग कह देते हैं , एक्टिंग है । मैं कहती हूं आप भी कर लो । कम से कम लोगों का दर्द तो सुना जाएगा ।

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बेरोजगारी वाकई में भारत भर की कितनी बड़ी समस्या है , लेकिन इसके समाधान का कोई सिलसिलेवार सामूहिक चिंतन-प्रयास नही है  ।

# राहुल गांधी जी के विडियोज़

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उपर्युक्त विडियो की मल्टीलेयर आलोचना - 

आम आलोचना - भईया  ! जो जिसकी समस्या है , वो उसकी समस्या  है । 

पुरूष आलोचना (निन्दा -चुगली टाइप) - हाँ ! सब पता है । डाॅलर मे कमाणा चांवें सब । 

स्त्री आलोचना (निन्दा -चुगली टाइप) - सारी नए सूट पहन री थी ।राहुल जी से मिलने के उपलक्ष्य में ।

ब्रूटल स्त्री-पुरुष आलोचना (निन्दा -चुगली टाइप) - जब नही पलते तो इतने बालक पैदा करने जरूरी हैं ।

वस्तुवादी आलोचना - भारत मे समस्यायों को ऑब्जेक्टिवली देखने की व्यवस्था ही नही है ।

दार्शनिक आलोचना - (मुझे इस पर श्रद्धा है ) - जो जहर इंसानों के जीवन को महान दुखों से भर देता है , उसका नाम है - अनंत लोभ ।

इन्सानों का एकमात्र कर्तव्य है कि वे इससे छुटकारा पाएं ।

वस्तुवादी दार्शनिक आलोचना  (matter of truth ) - अज्ञानता सबसे बड़ा पाप है ।

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ब्रूटल आलोचना दर्दनाक होने पर भी अंततः शुभ वस्तु है । क्योंकि  इसमें अज्ञान को खत्म करने की शक्ति है ।

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