इंसानों को मालूम नही है कि उनकी समस्या क्या है , और उपाय क्या है ।
जैसे ये कहा -अनंत लोभ। यह एक आध्यात्मिक दोष है । उपाय है -मर्यादा ।
बट कितनी ?क्या? यह पेचीदा पहेली है ।
इसका गणित इंसान स्वयं सुलझा सकता है । यह आत्म-संयम का विषय है ।
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यह दो जोडी कपड़े रखने का सुझाव नही है ।
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बहुत पहले मैने कभी(संभवतः राहुल गांधी जी की )स्टेटमेंट पढ़ी थी , कि एक सांसद के हाथ में यही है कि वह 8 किमी की रोड बनवा दे । ।😂
मुझे ऐसी ओनेस्टी भाती है । सब बंदों को वस्तुस्थिति का मालूम होना चाहिए।
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