भारत मे जजों को भी हिन्दी आलोचना के विषय शब्द शक्ति,अलंकार वगैरह का अध्ययन करना चाहिए। 😶
हिन्दी के वरिष्ठ आलोचक सुधीश पचौरी का गगन गिल की रचनाशीलता पर एक बेहतरीन लेख है ।
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ऐसा लगता है एक अंतराल मे बहुत सी चीजें वापिस-वापिस रिपीट होती रहती हैं । शायद इसी को संसार चक्र कहते हैं । हे प्रभु !
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शास्त्र की स्वाध्याय ही है जो मुझे फिर से तरोताजा कर देती है ।
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