शुक्रवार, 14 जुलाई 2023

एक बार एक बुद्धिजीवी के  मुख से मैंने यह कहते सुना था के दलितो के दूल्हे को घोड़ी पर नहीं चढ़ने दिया जाता,  इस बात से वे बहुत शर्मिंदा महसूस करते हैं। मुझे यह बात बहुत अद्भुत लगी थी ।कोई किसी और के कार्य से कैसे शर्मिंदा हो सकता है।

 फिर मैं सोचने लगी कि ऐसे कौन से कार्य है जिन पर मुझे शर्मिंदगी महसूस हुई है ।  तो पहला मेरे को ध्यान आया कि शादी-ब्याह मे  घरेलू महिलाएं जिन्हे प्रॉपर्ली नाचना नहीं आता, वे उत्साह  में टेडी मेढी उटपटांग तरीके से नाचती है तो यह बात मुझे बहुत शर्मनाक लगती थी ।

 एक और दूसरी बात। स्कूल मे झंडा फहराते हुए अगर झंडा ना खुले तो यह बात भी बहुत शर्मनाक लगती थी। मेरा कोई लेनादेना नही ।मै डायरेक्टली रिस्पॉन्सिबल नही ।फिर भी पता नही क्यों ,यह बात मुझे  बहुत शर्मनाक लगती थी।खैर

फिर मैंने शास्त्रों में बिल्कुल अनोखी अद्भुत बात पढी । की दुनिया मे जो इतनी हिंसा होती है ,आचार्य भगवंत महापुरुष इससे शर्मिंदा महसूस करते हैं। यह बात बहुत ही अद्भुत थी मेरे लिए। अभी मै बहुत दूर हूं यहां तक पहुंचने के लिए। 

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वैसे अब तो मै बहुत पार हो गई हूं इन बातों से । बेकार का लोड लेना बंद कर रखा है । अब मैक्सिमम ध्यान खुद के सुधार पर है।

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