एक स्वाध्यायी के रूप मे शास्त्रों का अध्ययन करना ,अहिंसादि 12 श्रावक व्रतो का यथाशक्ति पालन करना ; इस प्रकार यह मेरा जीवन तो चल ही रहा है ।
मै अपनी समझ के अनुसार लिखती भी रहती हूं ।
शास्त्रों मे जो विषय हैं उन्हे पढते हुए ये रिअलाईज होता है कि यह ज्ञान न जानना कितनी बड़ी अज्ञानता है ।
हर कोई इसे जाने यह संभव है , उसकी स्वयं की रेफरेंस भाषा मे यह संभव है ।बस सुनने का माहौल हो अगर तो ।
खैर
यह बात है जो मुझे लगातार, सतत प्रेरित करती है ।
...
But nowadays I feel-
Not to write here or anywhere.
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