मेरा अब किसी से कुछ कहने का मन नही होता । जिन दो-तीन जन को मेरी बातों की सच्चाई जची है , मेरे लिए तो उतना ही बहुत है ।
हम यहां तक आयेंगे, यह किसने सोचा था ।
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जिनवाणी की विशेषताओं मे से एक विशेषता है इसका अश्रुतपूर्व होना -अर्थात वह बात जो कभी पहले सुनने मे नही आई है ।
पानी मे जीव!क्या यह सुनने योग्य बात है । अगर सुनने को मिल भी जाए तो क्या यह मानने योग्य बात है ।
निश्चित रूप से आप अज्ञानता की दुर्लंघ्य गलियो को पार करोगे तभी इस बात की सच्चाई को मानोगे ।खैर
मै तो सुना न सकी पर इन सालो मे मैने अवश्य ऐसी बाते सुनी है जो मेरे लिए तो अश्रुतपूर्व ही है ।
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मै तो इसे भी महावीर वाणी की कृपा ही कहती हूं कि मन शांत है ।
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उदासीनता बड़ी कीमती चीज है ।आपको भी इसे अपनाना चाहिए।
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