शुक्रवार, 6 अक्टूबर 2023

 मुझे लगता है , मै हमेशा से एक खुशमिजाज,  मनमस्त बच्ची रही हूं ।मुझे सिर्फ एक ही टेन्शन रही है कि जिन लोगों ने मुझ पर भरोसा किया है ,वे निराश न हो ।

शायद यही कारण है कि बाद मे मै संत -धारा से जुड़ी।क्योंकि यह भी तो एक प्रसन्नता  की बृहत्तर धारा है । वैराग्य को लोग नेगेटिव सेन्स मे समझते है ।

कुछ दुख होगा , जो उधर गए। 

कुछ अभाव होगा ।इत्यादि 

बहुत हद तक तो इन बातों मे सच्चाई भी है । आखिर बहुजन-समर्थित राग रंग रंजित संसार मार्ग को छोड़कर कोई यूं ही तो नही आ जाएगा ,एक रूखे -सूखे मार्ग पर ।क्या लड्डू -पेड़े बँट रहे है यहाँ ।

मै कहती भी थी यह बात कि इस मार्ग पर आने के लिए संसार का विकर्षन नही , मार्ग का आकर्षण होना चाहिए। 

और देखिए!  जिन खोजा , तिन पाइयां । मुझे गुरूदेव मिल गए।

-कल सुशोभित की पोस्ट पढ़कर  

...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें