कल हम तिजारा जी गए थे ।बहुत दिनो के बाद सब लोग गए थे ।
आते हुए यह चौक दिखा था । वहां तो खींची नही । यह फोटो इन्टरनेट से निकाली है ।
जहां एक शेर की शक्ति और गाय की करूणा मिल जाती है , वहां महावीर की अहिंसा का सर्कल पूरा हो जाता है / प्रकट हो जाती है ।
यह प्रतीक मैने अनन्तचतुर्दशी के अवसर पर निकाले जाने वाली शोभा यात्रा मे भी देखा है ।
परम्पराएं किस तरह सत्यों को सहेजती हैं , यह देखना भी एक आश्चर्य है ।
मेरा पहले से मन था कि मै यह बात शेयर करूं ।पर मेरे पास फोटो नही थी। कल मैने यह मूर्ति देखी तो सुखद आश्चर्य हुआ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें