कल मनीष सिंह की पोस्ट बुद्ध धर्म के बारे मे थी । यह बात जैन धर्म पर भी उतनी ही लागू है ।
प्रतिकार की बात सही है , पर यह भी नही भूलना चाहिए कि महावीर स्वामी जी के सभी 11 प्रधान शिष्य ब्राह्मण थे ।
उन्होने अपने को जाति निरपेक्ष दिखाने के लिए अलग अलग जातियों के लोग शामिल नही किए ।
उनका मार्ग विशुद्ध चेतना की उच्चता का था ।
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मैं फेसबुक आऊंगी, जब दिल करेगा ।
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