सोमवार, 4 नवंबर 2024

मैं बौद्धिकता की उपयोगिता यह मानती हूं कि वह सन्मति को तेज धार से तराश दे , 

इस तरह कि एक मूल्यवान रत्न की भांति उसमें अहिसा के सब आयाम उद्भासित हो उठें , 

सन्मति की मूल उद्गम अहिंसा है ।

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