मैं बौद्धिकता की उपयोगिता यह मानती हूं कि वह सन्मति को तेज धार से तराश दे ,
इस तरह कि एक मूल्यवान रत्न की भांति उसमें अहिसा के सब आयाम उद्भासित हो उठें ,
सन्मति की मूल उद्गम अहिंसा है ।
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