गुरुवार, 7 नवंबर 2024

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प्रेम को अनिर्वचनीय कहा गया है , ज्ञान तर्क की वस्तु ।

प्रेम के मार्ग पर चलते चलते यह प्रकट होता है कि ज्ञान भी अनिर्वचनीय है ।

प्रेम भी ज्ञान ही है ।

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