सबकी अपनी अपनी दृष्टि होती है ।
हमारे नेता राहुल गांधी जी के लिए :
हैंडसम
स्मार्ट
बुद्धिमान
दुर्धर्ष
निडरसाहसी
कृतज्ञ*
हँसमुख
खुश तबीयत
सत्य विनम्र
स्वयं सूर्य **
मेहनती
पराक्रमी
खुश तबीयत
सत्य विनम्र
स्वयं सूर्य **
मेहनती
पराक्रमी
बच्चों मे बच्चे
जवानों मे जवान
तुम पूर्णायु होना
तुम दीर्घायु होना ।
तुम दीर्घायु होना ।
*इस गुण को समझना आज के बुद्धिजीवियों के लिए मुश्किल है ।उनका भी कसूर नही है । जब जमाना ऐसा हो कि एक गैरतमंद इन्सान यह कहे कि मेरे ऊपर ये अहसान करना कि मुझ पर कोई अहसान न करना ।तब इस गुण को समझना लगभग नामुमकिन है ।इस गुण को वही समझ सकता है जिसने स्वयं अपने ऊपर अहेतुकी कृपा अनुभव की हो ।
दुनिया को ये सब बातें मूर्खता ही नजर आती है ।
मै भी मुर्ख हूं ।
अब इस बात मे कौन सी समझदारी है कि लेखकों की दुनिया मे महावीर स्वामी जी का झंडा उठाकर चले आए।
अगली मूर्खता - एक बन्दी को चुना जो दिल्ली छोड़ो,भारत मे ही नही रहती । .....so on .
.......
कोई तुम्हारे ऊपर से पहाड जैसा बोझ हटाकर फूल के जैसा हल्का बना दे तो वह खुशी मै जानती हूं । फिर मै क्यो नाम न लूं अपने गुरुओं का ।अपने महावीर स्वामी जी का ।
**अपनी उर्जा से चालित होते है ।औरों को भी चलाते हैं ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें