राहुल गांधी जी की भारत जोड़ो यात्रा चल रही है |अगर इस यात्रा के गंभीर चिंतन अभिप्राय की ओर ना जाए ,केवल उन तस्वीरों को देखें जो उनके एफबी पेज पर रोज अपलोड होती हैं तो एक सामान्य दर्शक भी इस यात्रा के गहरे निहितार्थ का एक दर्शन किए बगैर नहीं रह सकेगा |
कन्याकुमारी से कश्मीर तक चल रही है यह यात्रा कई राज्यों को पार कर चुकी है |केरल, तमिलनाडु ,आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश से होती हुई यह आजकल राजस्थान में चल रही है |इस लंबे वक्त के दौरान की तस्वीरों को हम देखें तो यह देश की संकुचित दृष्टि को तोड़कर देश को देखने की एक वृहद दृष्टि देती है |
- देश लोगों से बनता है | लोग अलग-अलग रूप रंग के होते हैं | कोई काला ,सांवला ,गोरा ,गेहूंआ ,छोटा ,नाटा , लंबा , मोटा, पतला होता है | अलग-अलग अवस्थाओं के होते हैं _बच्चे ,बूढ़े, जवान,अधेड़ | उनमें लैंगिक विभिनता होती है - पुरुष ,स्त्री , ट्रांस |वे अलग -अलग धर्म के होते हैं - हिंदू ,मुस्लिम ,सिख ,इसाई ,जैन| वे अलग-अलग प्रोफेशन के होते हैं - वकील, एक्टिविस्ट , अभिनेता -अभिनेत्री ,सफाई कर्मी ,दुकानदार , डॉक्टर, टीचर, क्रिकेटर |
-यात्रा में आए हुए लोग राहुल गांधी जी के साथ फोटो खींचाते हैं |शायद सबको तो मौका नहीं मिलता होगा |यह संभव भी नहीं है |लोग घर से अपने बच्चों को तैयार करके लाते हैं |उन्हें नए कपड़े ,जूते पहनाकर -सजा कर लाते हैं |बहुत से बच्चे विभिन्न प्रकार की वेशभूषा में सज कर आते हैं |बड़े लोग भी ,ध्यान आकर्षित करने के लिए ,अलग वेशभूषा में आते हैं |यह सब मिलकर एक मानव नदी का रूप धारण कर लेते हैं |एक ऐसी नदी जो कभी हंसती -खिलखिलाती हुई दिखती है ,तो कहीं मध्यम शांत गति में बहती नजर आती है |
यह सब भावनाएं भारत यात्रा की तस्वीरों को देखने मात्र से मन में उद्बुद होती हैं |साथ ही मन में प्रश्न उठता है -इतनी अधिक विविधताओं को एक पहचान के पीछे कैसे धकेला जा सकता है | यही भारत जोड़ो यात्रा के निहितार्थ हैं |
Ps: हुआ तो हम भी आएंगे इस यात्रा मे ।जब यह दिल्ली आएगी ।मेरी बहन के हसबैंड है ।अंकित जी ।उनके साथ हम सब आएंगे ।
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