1996 में मै 20 साल की थी । गुरूदेवों के चातुर्मास के बाद मेरी रूचि धर्म की ओर हो गई। ये स्टडीज का असर तो होता ही है ।कभी मुझे भी ख्याल होता था कि यह सब तो बुढ़ापे के काम है । खुद पे शंका होती थी । प्रवचन मे एक बार गुरूदेव ने फरमाया ' मेरे देश के युवा ऐसे हो जिनमे जवानों का उत्साह और बूढ़ों का विवेक हो ', तब के बाद मैने ये बात दिमाग से निकाल दी '।
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सुना है चीन की धरती इन्डिया से पाँच गुना है । # कहना आए या ना आए कहना चाहिए ।
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