देश भर मे कितनी तरह की विचारधाराएं गतिशील रहती हैं । ऐसा लगता है कि कोई विशाल, महाकाय पाॅटब्आइलर हो । .....हमारा कर्तव्य तो अपने आप का प्रक्षालन करना है ।
राजनीतिक परिदृश्य मे तो चुनावी जीत को अपनी विचारधारा की जीत कह देते है । मजे की बात है हार के बाद ये नही कहते ' हमारी विचारधारा की हार हुई है ।😉
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें