सोमवार, 15 जनवरी 2024

शास्त्र में ही इतने बेशुमार विषय हैं कि 3-4-5 जीवन भी कम पड़ जायेंगे समझने के लिए,  फिर कहां फुर्सत है कुछ और सोचने के लिए। 

मेरा समय तो ऐसे ही व्यतीत होता है ।यह सुख है ।

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