विचारधाराएं स्थायी नही होती , सफल होने की कामना स्थायी होती है । फिर चाहे युग कोई भी हो । विचारधारा का चोला तो रूख देखकर ओढ़ लिया जाता है ।
सफल होने की कामना में अ-बुद्धिमत्ता कुछ भी नही ।
असफल होने की कीमत पर विचारधारा को पकड़े रहना , यह बहुत बड़ा दांव है ।
दुनिया में कुछ ही दुर्लभ हैं ,जो इसे खेलने (झेलने 😊) में सक्षम हैं । 'वह ' अपने बच्चों की रक्षा करता है
....
अहिंसा की विचारधारा राग से वीतरागता की साधना है ।
....
मैंने कई लेखकों के अनुभवों में उपहास , तल्खी, कड़वाहट, और अवसाद को देखा है ,जो उन्हे सरस्वती शिशु मंदिर टाइप स्कूल संस्थानों में हुए।
...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें