सोमवार, 14 अक्टूबर 2024

विचारधाराएं स्थायी नही होती , सफल होने की कामना स्थायी होती है । फिर चाहे युग कोई भी  हो । विचारधारा का चोला तो रूख देखकर ओढ़ लिया जाता है ।

सफल होने की कामना में अ-बुद्धिमत्ता कुछ भी नही । 

असफल होने की कीमत पर विचारधारा को पकड़े रहना , यह बहुत बड़ा दांव है । 

दुनिया में कुछ ही दुर्लभ हैं ,जो इसे खेलने (झेलने 😊) में सक्षम हैं । 'वह '  अपने बच्चों की रक्षा करता है 

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अहिंसा की विचारधारा राग से वीतरागता की साधना है ।

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मैंने कई लेखकों के अनुभवों में उपहास , तल्खी, कड़वाहट,  और अवसाद को देखा है ,जो उन्हे सरस्वती शिशु मंदिर टाइप स्कूल संस्थानों में हुए।

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