गुरुवार, 3 अक्टूबर 2024

 जैन दर्शन में - 

5 ज्ञान हैं - मति ,श्रुत, अवधि,मनःपर्याय , केवल ज्ञान । 

4अज्ञान हैं - मति ,श्रुत, अवधि,मनःपर्याय  ।

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आम समझ में अनपढ़ता को अज्ञानता मानते हैं । 

सामान्यतः पढ़े -लिखों में ज्ञान के अभाव को अज्ञान कहते हैं ।

विशेष ज्ञानियों ने ज्ञान की सम्यकता को ज्ञान कहा है , उसकी असम्यकता को अज्ञान कहा है , फिर वह कितना ही बड़ा डिग्रीधारी हो । 

#महावीर वाणी

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