जैन दर्शन में -
5 ज्ञान हैं - मति ,श्रुत, अवधि,मनःपर्याय , केवल ज्ञान ।
4अज्ञान हैं - मति ,श्रुत, अवधि,मनःपर्याय ।
...
आम समझ में अनपढ़ता को अज्ञानता मानते हैं ।
सामान्यतः पढ़े -लिखों में ज्ञान के अभाव को अज्ञान कहते हैं ।
विशेष ज्ञानियों ने ज्ञान की सम्यकता को ज्ञान कहा है , उसकी असम्यकता को अज्ञान कहा है , फिर वह कितना ही बड़ा डिग्रीधारी हो ।
#महावीर वाणी
...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें