जब हमारा मन स्वतंत्रता से कार्य करता है, तब ही वह अपने सर्वश्रेष्ठ परिणाम को प्राप्त करता है। आनन्द तभी प्रकट होता है । इसलिए मन की स्वतंत्रता को मैं बहुत महत्त्व देती हूं ।इतने वर्ष बीत जाने पर भी मैंने टीम* में आज तक किसी के लिए कोई भी निर्देश नहीं दिया, क्योंकि मैं ' प्रोसेस' को महत्त्व देती हूँ। वे सब चीजें देख रहे हैं , जब ठीक लगेगा वे अपने आप मनमुताबिक कार्य मे प्रवृत होंगे।
मेरे लिए शास्त्र का अर्थ था - भगवान की ऑथेंटिक वाणी। इस बात पर मुझे श्रद्धा अपने गुरुओं के कारण से है । क्योंकि हमारे गुरु भी तो उसी वाणी के हिसाब से अपना जीवन चल रहे हैं।
कहते है इंसान का मन गहनतम होता है। जब मैंने शास्त्र पढ़ने शुरू किए तब मुझे उस विपरीत रास्ते का पता चला , जिसपर सारा संसार चल रहा है । मैं भी चल रही थी।
शास्त्र पढ़कर ही मैंने अपने मन की गहनतम संदेहों को जाना। इनकी एक छोटी बानगी** मैंने पहले भी फेसबुक पर कई पोस्टों में लिखी है। वह एक अलग पोस्ट के रूप में दोबारा लगाई है ताकि पाठक देख सके।
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* टीम के लिए मैं कहूँगी की इसके दो फेज रहे ।पहला फेज 2016 तक था । उसके बाद डेढ़ -दो साल तक तो मैं चली ही गई थी। उसके बाद 19 से कुछ सुगबुगाहट दोबारा शुरू हुई थी ।तो जो पहली टीम थी वो तो डिसमिस ही समझिए । उसका तो कुछ हुआ ही नहीं क्योंकि ना किसी ने रिस्पॉन्स किया ,ना प्रोग्राम बने ।
प्रोग्राम तो दूर की बात है ,लाइक तक नही की । सब बने भी रहे ,और अड़कर खड़े भी रहे । हमने अब तक यही झेला है । फिर भी मै खुश हूं । जो हुआ है ,शुभ हुआ है । क्योकि इस संघर्ष मे ही हमने खुद को पहचाना है ।
दुनिया के इतिहास मे शायद ही कोई अफल होकर इतना खुश हुआ होगा ।
आगे क्या होगा । मुझे नही मालूम।
**भगवान की वाणी पे श्रद्धा करने वाले जन वे भाग्यशाली 'नेपो किड ' हैं ,जिन्हे अपने भावों को व्यक्त करने के लिए एक बनी बनाई भाषा स्वयंमेव ही प्राप्त हो गई है ।
धार्मिक विषयों मे चिन्तन मनन को शास्त्रीय भाषा मे अनुप्रेक्षा कहते हैं। यह स्वाध्याय के पांच भेदों -वाचना ,पृच्छना ,अनुप्रेक्षा आदि मे से तीसरा भेद है ।
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अपनी ही नही , फेसबुक पे मै कई पोस्ट ऐसी देखती हूं जिनका सार महावीर वाणी मे आया है ।
मनीष सिंह की पोस्ट है -जगजीत सिंह की गजल पर । शरारा ,दो घड़ी का है खेल सारा टाइप । इसमे जो बात कही गई है ,वह हूबहू कई शास्त्रीय तथ्यों से मेल खाती है ।
ऐसी पोस्ट और भी हैं । अभी याद नही आ रही ।
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जब मै ये पोस्ट देखती हूं तो मेरे मन मे यह क्लांति उपजती है कि हाय!ये बात सही समझ रहे है , कह भी रहे है , बस ये समग्रता से अनजान हैं ।
खैर
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महावीर वाणी का मार्ग सुख -शांति का सच्चा मार्ग है ।
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