रविवार, 16 जून 2024

विशाखा-3- काला कौआ

विशाखा पहली क्लास में थर्ड आई थी। स्कूल से इनाम में एक लंच बॉक्स और एक लाल रंग की बड़ी गेंद मिली थी। वह खुशी के मारे सबको दिखाती हुए घूम रही थी । पहले दादी को दिखाई , मम्मी को, ताई के बच्चों को, फिर सामने गली में  एक घर छोड़कर बुआ को दिखाने गई। बुआ उसे देखकर खुश हुई और कहा- अच्छी बात है। वह अड्डे पर दरी बना रही थी ।

विशाखा उछल- उछल कर सबको अपनी गेंद दिखा रही थी । उसकी खुशी संभल नहीं रही थी। कभी वह इस घर में घुसती, तो कभी उस घर में। उत्साह की मारी वह ओम बाबा के घर तक चली गई।

 घरों में काम कर रही महिलाएं-  कपड़े धोती हुई, कपड़े सुखाती हुई, झाड़ू से चौंक धोती हुई, सब्जी काटती हुई, सब्जी बनाती हुई , आटा गूंथती हुई, रोटी बनाती हुई - उसका उत्साह देखकर बहुत खुश थीं।

उसके पीछे सब बच्चे लगे थे। उनके हृदय ईर्ष्या की आग में जल रहे थे। वे बस पास हुए थे। उन्हें कोई इनाम नहीं मिला था।

 आह ! कितनी बढ़िया गेंद है  ! कैसा लाल रंग है  ! काश वे भी ऐसी बॉल ले पाते ! - वे बड़ी हसरत से बॉल की ओर देख रहे थे। वे विशाखा के आगे इसरार भी कर रहे थे कि  एक बार वह उन्हें  भी बॉल हाथ में दे दे। बाॅल हाथ में लेकर देखने के बाद वे वापस दे देंगे।

 क्यूं दूँ?  मेरी हैं। मुझे इनाम में मिली है। मैं थर्ड आई हूँ। मैं नहीं दूंगी। - कहती हुई विशाखा इतरा रही थी।

 तभी काके ने बॉल पे झपट्टा मारा।  वह बॉल को लेकर अपने घर की ओर भागा। विशाखा चिल्लाई । वह भी काके के पीछे भागी।। सारे बच्चे भी भागे ।  भागते हुए काके अपने घर में गया और अड्डे में काम आने वाला एक लंबा सुंआ बॉल में ठोक दिया।

 फटाक! -  बॉल गुब्बारे की तरह फट गई।

 ये ले अपनी बॉल - काके ने लाल प्लास्टिक विशाखा की ओर फेंक दी।

 विशाखा ज़ोर से चिल्ला कर रो रही थी ।  उसे काके काला कौवा प्रतीत हुआ, जिसने सख्त चोंच से उसकी खुशी को नोच लिया था। काके का रंग काला था। वह ज़ोर ज़ोर से रो रही थी।

 मेरी बाॅल तोड़ दी। 

काके ने मेरी बाॅल तोड़ दी । 

बुआ कमरे में आयी। उसने उसे दुलारा -पुचकारा । काके को डांटकर भगाया। बुआ ने उसे आश्वासन दिया कि वह ऐसी बॉल दूसरी ला देगी । उसने उसे खाने की चीज़ दी। तब जाकर विशाखा का रोना कम हुआ। 

रात को विशाखा ने  पापा के आगे काके  की शिकायत लगाई। पापा ने सारी बाते सुनी और कहा - बस ! तू थर्ड आयी है। फर्स्ट क्यों नहीं आयी।

एं -  उसका रोना बंद हो गया।

यहाँ  काके ने  मेरी बॉल फोड़ दी। पापा को फर्स्ट आने की पड़ी है-विशाखा के मन में आया।



 .....

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें