गुरुवार, 20 जून 2024

परसों जो मैंने पेंटिंग की पिक शेयर की थी, वह चित्रकार विजय बिस्वाल की बहुत सराही जाने वाली कृतियों में से एक है। वे खुद इसका कारण नहीं जानते कि एक साधारण चूल्हे की पेंटिंग को क्यों इतनी सराहना मिलती है।

 सचमुच ही यह तो समझने की बात है कि घर का साधारण चूल्हा,  हर घर में मिल जाता है ,अगर उसे रंगों से संवार दिया जाए, तो वह दर्शक के भीतर ऐसा क्या सम्मोहन जगाता है कि वे उसकी सराहना करते हैं।

 मेरी समझ में तो इसका उत्तर यही हो सकता है। यह जीवन है।

 अज्ञात कारणों से जब जीवन के ऊपर दबाव बढ़ता जाता है तो कलाकार की चेतना उन वस्तुओं में जीवन के आनंद को ढूंढती है जो बिल्कुल साधारण रूप में है।

 जीवन के साधारण चित्रों में , छिपी हुई है -  जीने की ,जीवित होने की अदम्य आदिम लालसा।

कुछ इसी तरह का भाव है'  दर्पण मांही आग ' सीरीज की स्मृति चित्रमाला में।

...

 डायरी के नोट देखे तो, साल के हिसाब से 'उववाई ', यह शास्त्र 2017 से पहले पढ़ा गया है। 16 भी हो सकता है ।15 भी ।  उस समय इसको पढ़कर मुझे अपनी कजिन बहन की शादी के मंजर याद आए थे। मैंने उसे एक कहानी के रूप में लिखना चाहा था। लिखते -लिखते लगा कि यह तो एक लघु उपन्यास ही बन जाएगा। पर वह बात वहीं रह गई ।

आगे यह बात इस रूप में सामने आई है ।सही फार्म मिलने मे इतना समय लग गया ।

....

My 2024 is done ✔️ 

अब तो पुराने पेंडिंग काम पूरे करने है ।

आगे की आगे देखेंगे।  

...



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें