रविवार, 14 अगस्त 2016

ek kahani ki shuruaat -2

तो हमारा जे डी दिखने में ऐसा है की किसी ऊँचे खानदान का चश्मे- चिराग लगता है।
दोस्तों ,आपने अपने जीवन में जिस किसी सबसे ग्रेसफुल इंसान को देखा हो तो आप अपनी कल्पना में उसे जे डी मान लेना।
ये पतले से हैं ,थोड़े सांवले हैं। वैसे ज्यादातर मौन ही रहते हैं (  समझ गए न !) पर जब कभी रौ में आते हैं तो उस समय जे  डी का तेज संभाले नहीं संभालता। उस समय इनकी वाणी में संसार भर का ज्ञान बोलता नज़र आता है।
जे डी से मेरी मुलाकात यूँ कहने को तो बचपन में ही हो गयी थी ,जब मैंने गुरुओं के पास बैठकर सामायिक के नौ पाठ और २५ बोल का थोकडा इत्यादि सीखा था। पर वह मुलाकात तो ऐसी थी की मानों दो घरों के बच्चे कहीं शादी में मिल गए। .दोनों ने मिलकर टिक्की खा ली ,आइसक्रीम खा ली ,पानी लिया ,स्टेज के पीछे जाकर दुल्हन के ऊपर फूल फेंक आये। बस। .फिर अपने अपने घरों में चले गए। पर ऐसी मुलाकात से भी पहचान की स्मृति तो बनती  ही है। 

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