शनिवार, 13 अगस्त 2016

Ek kahani ki shuruaat

चलो एक कहानी सुनाती हूँ। कहानीनामा में औरों की कहानियों के लेखे जोखे लिख रही हूँ ,तो सोचा क्यों न एक कहानी मैं भी कहूँ।
उससे पहले यह बता दूँ कि बोलने की आज़ादी को मैं बड़ा कीमती मानती हूँ। मनुष्यों ने आज तक के सफर में जो कुछ भी अर्जित किया है ,वह कहकर (श्रुत परम्परा )ही आगे बढ़ाया है। पर बाकि सभी चीजों की तरह ,आज के समय में ,इसमें भी बड़ी खराबियां आ गयी हैं। तेरा -मेरा ,गुटबाज़ी ,पॉलिटिक्स.... न जाने क्या क्या।इसलिए कहने से पहले अपनापन तो अर्जित करना ही चाहिए।खैर
हम सारी दुनिया को तो बदल नहीं सकते ,मगर अपनी अदबी मित्रता के छोटे से घेरे में तो ऐसी चीजों को बचा सकते हैं ,जहाँ हम एक दूसरे के सबसे निर्मम आलोचक हों (कि हमें इम्प्रूव करने के लिए किसी और की आलोचना की ज़रूरत ही न पड़े ) और एक दूसरे के सबसे बड़े प्रशंसक भी।
तो बात इस तरह शुरू हुई कि एक बार स्कर्ट वाली लड़की ने मुझे कहा कि मैं बहुत कठोर हूँ। उसकी बात सुनकर मुझे मिर्च तो बहुत लगी (दोस्तों ,अपनी बुराई किसे पसंद आती है ) ,पर ठंडे दिमाग से सोचने पर मुझे उसकी बात उतनी गलत भी नहीं लगी। बल्कि मुझे हैरानी हुई कि ऐसी बात उसे पता कैसे लगी।
सच कहूँ ,इसका सही सही कारन तो मैं भी नहीं जानती।मुझे लोगों की शुद्रताएं हज़म नहीं होती। मैं ऐसी ही रही हूँ ,शुरू से ही। जैनिज़्म तो लाइफ में बहुत बाद में आया।
  खैर
पिछली कहानी तो मैं बता नहीं पाऊंगी (क्योंकि उसका कोई शुरूआती सिरा ही नहीं ,जहाँ से बात चलाऊं। हो सकता है ,बीच में कहीं बात -बातों में कुछ आये तो आये ) पर आज की कहानी में जरूर बता सकती हूँ।
इसके लिए एक केरेक्टर की रचना करते हैं। इस केरेक्टर का नाम है -जे डी (जैन दर्शन। )
इस केरेक्टर को मैं अपने दोनों गुरु का मिला जुला रूप दे रही हूँ। ये दोनों सगे भाई थे
सेठजी महाराज - पतले से हैं ,मौन रहते हैं। इनका मौनी बाबा नाम प्रसिद्ध है।इनकी आवाज़ बहुत महीन है।
राम प्रसाद जी महाराज -मोटे थे ,गोल -मटोल चेहरा ,गज़ब के विद्वान् ,कई भषाओं के जानकार ,तेजस्वी ,प्रवचनकार कंटद

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