सोमवार, 29 मई 2023

राहुल गाँधी जी के वीडियोज- 2

यह वीडियो हिंदू कॉलेज के मैस के छात्रों के बीच हुई बातचीत दिखाता है -

अगर हम भारत जोड़ो यात्रा के तमाम वीडियो और रील्स को देखें तो मुख्य रूप से ये मुद्दे चिंतन के केंद्र में दिखते हैं।

 1 मीडिया की उदासीनता - जनता के मुद्दों पर उदासीनता का मुद्दा असल मुद्दा 'खबर ना दिखाना नहीं ' बल्कि उन समस्याओं के समाधान के प्रति उदासीनता है कि समाज में यह जागरूक चेतना क्यों नहीं है ।

इस वीडियो में राहुल गांधी जी फोर्सेस की बात करते हैं कि वे कहां है जो इन समस्याओं को समाधान की ओर ले जाए ।

2 ट्रोल से कैसे निपटे -  इस प्रश्न का समाधान राहुल गांधी जी महात्मा बुद्ध की इस शिक्षा से देखते हैं कि तुमने अगर गाली नहीं ली तो वह तुम्हें मिली नहीं। वह इस विचार का लाइव डेमो मोबाइल या किसी चीज के पकड़ने से करके दिखाते हैं । निश्चित रूप से समस्त नकारात्मकता के सामने यह  एक दुर्धर्ष आत्म का अपराजेय उद्घोष है।

 मुझे पत्रकार आशुतोष का लिखा हुआ एक लेख याद आता है की सभी गांधीओं में अकेले राहुल हैं जिन्होनें खूब नकार झेला है । इनसे पिछले वाले  स्वीकार के सुगम पथ पर चलकर आए थे ।

 3 इंडिया की मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना 

4 शिक्षा 

5 विभिन्न आर्थिक वर्गों की समस्याएं इत्यादि 

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इस वीडियो में राहुल गांधी जी थॉट और ऑब्जरवेशन पर एक दिलचस्प बातचीत की है ।

थॉट क्या है ?  यह हमारी धारणा , पूर्वग्रह, सम्मति कुछ भी हो सकती है। बहुदा हम अवेयर नहीं होते ।हम यह भी नहीं जानते की इसका निर्माण हमारे भीतर किस तरह होता है। पर हम इसके द्वारा संचालित होते हैं ।

ऑब्जरवेशन है - देखना । बिना थॉट के देखना ।

एक उदाहरण से समझाने की कोशिश करती हूं। भिखारी दया के पात्र हैं। यह धर्म के तहत प्रचारित एक सर्वमान्य विचार है। लेकिन यह भी देखा जाता है कि भीख मांगते समय वे दीन होने का अभिनय करते हैं ।भीख प्राप्त होने पर बाद में मुस्कुराते हैं। खुश होते हैं ।एक तो यह स्वाभाविक भी है । उनमे से कई ढीठ किस्म के 'दूसरे को कैसा उल्लू बनाया' के ख्याल से खिल्ली उडा कर खुश होते है ।

कहने का अर्थ है- ऑब्जरवेशन विचार के विपरीत भी हो सकती है । तब अगर आप यह विचार बना ले की सभी मांगने वाले ऐसे कपटी होते हैं। यह भी सत्य के विपरीत एक विचार ही है।

इस बातचीत का सार है - सजगता ।

ताकतवर और कमजोर का एक प्रसिद्ध बिंब हाथी और चूहे के माध्यम से समझाया जाता है। यह भी एक विचार है । ऑब्जरवेशन यह भी हो सकती है कि हाथी तो चूहे को बचाना चाहता है । चूहा नहीं मान रहा है ।उछल उछल कर खुद हाथी के पैरों में आ रहा है। 

इस बातचीत का सार है - सजगता ।

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