मुझे बहुत समय से लग रहा है मेरा काम पूरा हो गया है । जिसने जो समझना था समझ लिया ।आजकल के जमाने मे लोग इतने मैच्योर है कि क्रांति का अर्थ मुझे तो शान्ति ही पसंद है ।
जिस तरह मै लिखती हूं , कोई भी ये समझेगा कि मैने सबको जैनी बनाने का अभियान छेड़ रखा है ।
ऐसी बात नही है । मै बस शब्द और आचरण की दूरी घटाना चाहती हूं , जितना रियलिस्टिकली संभव हो सके ।
जैन होना मेरा मन है , प्राण है । अगर आप शब्दों की अपरिचित -पन को पार कर लो तो आप पाओगे कि यह न सिर्फ वर्तमान जीवन बल्कि आगे के जीवन का भी प्रशस्त ,उत्तम मार्ग है ।
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प्रसिद्धि को नापने का भी तरीका होता है । एक्टर्स की पेमेंट , मार्केट वैल्यू ऐसे ही तय होती है । ... पर इसका तरीका मै नही जानती ।
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लोगो के बीच मे एक मूलभूत विभिन्नता लैंगिक होती है । मगर विमर्श का वह बहुत ऊंचा लेवल है जहां यह विभिन्नता खत्म होती है ।उसके नीचे तो तू तू -मैं मैं ही है ।
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