बहुत बातें ऐसी होती है जो दूसरों के आगे कहने में , पुनः नए ढंग में समझ आती हैं ।
संवत्सरी का जो प्रसंग मैने शेयर किया था , यहां लिखकर , बाद में मुझे रियलाइज़ हुआ कि देखो ! जैनों का मुख्य महापर्व सुदूर अनन्तकाल में घटी एक ऐसी घटना के आधार पर मनाया जाता जिसका जैन धर्म के प्रतीकों या महापुरुषों से कोई मतलब नही है ।
वे लोग जैन नही थे । न ही उन्होने प्रवचन सुने थे ।
प्रकृति मे हो रहे परिवर्तन से अभिभूत होकर स्वतः हृदय की प्रेरणा से उन्होने शाकाहार अपनाया था ।
यह एक बात ही कितनी प्रेरणास्पद है ।
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Me and my family will meet our leader rahul gandhi ji ,may be, someday.
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