वे शिक्षक जिनकी मैं कल बात कर रही थी , ऊपर ऊपर से ढोंग करते हैं अ-श्रद्धालू होने का , चंटई , सन्नी लियोनी । यह एक खोल है जो इन्होंने ओढ़ रखा है अपने भीतर की श्रद्धा को बचाने का ।
अन्यथा कहीं भीतर ये गहरे आदर्शवादी हैं । कहीं झलक देखते हैं सच्चाई की, तो झुक जाते हैं।(कड़ी परीक्षा लेने के बाद। इस मामले मे पूरे कडियल हैं )
स्वयं अपने जमाने के माने हुए प्रभावशाली सत्ता पुरुष, विचार पुरुष, सत्ता-विचार पुरुष होते हुए सबके सामने एक अदना स्त्री से माफी मांगने में भी नहीं हिचकिचाते ।(टाइमलाइन याद रहे)
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मैने कभी लिखा नही ।
क्या फायदा ।
दरअसल हिन्दी मे लोगों के जुड़ने की ऐसी चित्र-विचित्र वैराइटियां है कि ऐसे सरोकार से भी कोई जुड़ सकते है ,यह बात हजम करने मे अभी 1000 साल तो लग ही जाएंगे ।
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#कल शिक्षक दिवस था।
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