हमारे समय के विभिन्न वादों का -मार्क्सवाद,नारीवाद,दलित विमर्श आदि का जैन दर्शन की वैचारिकता के आलोक मे विश्लेषण करना मेरी भविष्य की योजनाओं मे से एक योजना है ।जैन दर्शन को मात्र एक सम्प्रदाय का दर्शन नही समझना चाहिए। यह कार्य मै सयुंक्त रूप मे करना चाहती हूं ।
आलोचना अंत मे करेंगे।देखते है क्या रहेगा ।
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