मेरे जीवन में बहुत सी चीजें , जो आगे चलकर जीवन में आमूलचूल परिवर्तन का कारण बनी, वे मुझे यूं ही चलते -चलते मिल गई | इसे संयोग कह लो | मैं इसे महावीर स्वामी जी की कृपा कहती हूं |
"आप नवागंतुक लेखकों को क्या सलाह देंगी जो लेखन में शुरुआत करना चाहते हैं ?
सुधा अरोड़ा जी से यह प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने उत्तर में कहा कि डायरी लिखने से शुरू करना चाहिए| " मैंने भी लेखन की शुरुआत इसी तरह की है ।"
यह हर लेखक , एक्टर, खिलाड़ी या किसी भी क्षेत्र में सफल व्यक्ति से पूछा जाने वाला सबसे कॉमन प्रश्न है | कह सकते हैं राह चलते पूछे जाने वाला प्रश्न है | इस सलाह को मानकर मैंने 2013 में डायरी लिखना शुरू किया था |
यह कोशिश मैंने पहले भी एक बार की थी | फिल्में देखकर , फिल्मी हीरोइन की तर्ज पर " डियर डायरी "लिखकर शुरुआत करते हुए | पर वह कोशिश कामयाब नहीं हुई |
"आज मैं इतने बजे उठी ,मैंने यह खाया के बाद " कुछ समझ नहीं आता था कि आगे क्या लिखूं | आखिर मैंने खुद ही बोर होकर उस नकली हीरोइनपन से छुट्टी पा ली | अबकी बार डायरी लिखना शुरू किया तो शुरुआती असमंजस के बाद आखिर मैंने " क्या लिखूं " का समाधान पा ही लिया |
मेरा जीवन मुख्यतः पति -बच्चों ,मायके , ससुराल,fb , गुरु और पढ़ाई ; ये है | तो इन्हीं से जुड़ी बातें लिखने लगी |जो कुछ पढ़ती थी उसके नोट्स बनाती थी |"कहानीनामा" ब्लॉग में वही नोट्स है |शास्त्र पढ़ती हूं तो उसके भी नोट्स बनाती हूं |फिर बहुत बार उन्हें पढ़ती रहती हूं | वास्तव में नोट्स बनाने का लक्ष्य भी यही है | शास्त्र तो दोबारा उठाएंगे नहीं ,पर अपनी समझ के हिसाब से जो नोट्स बनाए हैं उन्हें वापिस- वापिस फेरने से वे विषय धीरे-धीरे हमारे चिंतन में आ जाते हैं और हम उन पर गहराई से विचार कर पाने में सक्षम होते है|
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