मंगलवार, 3 जनवरी 2023

 मेरा मन बुझा हुआ था ।परसों गुरुजी के दर्शन किए तो कुछ जान आई है । अब थोड़ा बेहतर फील कर रही हूं ।

सब लोगों ने जाते साल पर अपने हिसाब से लिखा ।साल 2022 मेरे लिए इस कटु अहसास पे खत्म हुआ कि एक इन्सान एक छोटे कांटेक्स्ट में सही होकर भी बड़े कांटेक्स्ट मे गलत हो सकता है 

।तब उसे कितनी गहरी पराजय का अहसास होता है । .........और यह अहसास भी कि सही होना या गलत होना इंसान के हाथ मे नही होता ।

पिछले दिनों मे मैने इस अहसास की कटुता ही सही ।वैसे जब मै इस की कटुता सह रही थी ,तभी मैने इसका मधुर पक्ष भी देख लिया था । 

अब चुंकि गुरूदेव के दर्शन करके मेरा मन थोड़ा बेहतर है इसलिए बता देती हूं कि  मैने भी एक ऐसी पराजय झेली है । पर मै तो पराजित होकर भी खुश थी ।

क्योंकि......

तुम्हे पराजित करने वाला तुम्हारा  अपना हो तो फिर इनसान को शोक नही करना चाहिए। 

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