बुधवार, 18 जनवरी 2023

इस साल मेरी दो किताबे आने की संभावना है । होपफुली। .....वैसे दोनो का आधा काम तो हो ही गया है ।

एक होगी -जैन आगमो मे आए कतिपय साहित्यिक स्थल। इनमे दो मुख्य आगम -ज्ञाता धर्म कथांग और उववाई पर लेखमालाएं पहले ही 'स्वाध्याय दर्शन पत्रिका 'मे छ्प चुकी है ।

दूसरी किताब कहानियों की होगी ।

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आजकल मौसम इतना खुशगवार चल रहा है कि इस वक्त दूसरी कोई बात करना लगभग क्राइम है । लिटरली। 

ऋतुओं मे मैं बसन्त हूं - गीता मे श्रीकृष्ण ने कहा है ।

बसन्त अभी आएगी । पर क्या हमे नही पता कि वह आएगी ही ।ये मेरी बहुत प्रिय पंक्तियाँ हैं ।मै हर साल लिखती हूं । मुझे इन पंक्तियों मे , इस मौसम का सौन्दर्य,भगवद् कृपा के रूप मे दिखलाई देता है ।

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आजकल लोग जिस बहुसंख्या मे रील बनाने मे लगे है ,मेरे अंदर एक छिपा हुआ भय घर कर रहा है कि कहीं बहू या दामाद ऐसे रील बनाने वाले दीवाने निकल गए तो मुझे भी कैमरे के आगे आडी- टेढ़ी शक्लें न बनानी पड़ जाएं ।🙂


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