शनिवार, 30 दिसंबर 2023

बल और शक्ति

--------

स्थानांग सूत्र और समवायांग सूत्र संख्यात्मक हैं। जो भी विश्व में और संसार से वस्तुएं हैं, भाव है, या पदार्थ है , उनकी संख्या के आधार पर इन सूत्रों में कहा गया है। स्थानांगसूत्र के दसवें अध्याय में 10 तरह के बल बताए गए हैं।

1-5  श्रोतेन्द्रीय बल

 चक्षुन्द्ररीय बल 

घ्राणेन्द्रीय बल

रसना इन्द्रिय बल

स्पर्श इंद्रिय बल 

 6-9 ज्ञान,  दर्शन,चारित्र , तप बल 

10 वीर्य बल

बहुत बार समझने की शुरुआत रटने से होती है। हमारे यहाँ सुनते सुनते 5  इंद्रिय, 4 ज्ञान दर्शन चारित्र तप 4 कषाय आदि  । यह सब इस तरह मतलब ये बातें बार बार आती है, तो रट जाती है। रटने से बातें दिमाग मे बैठ जाती है ।

 बट , रटने से समझ खुलती नहीं है। समझ खुलती है अपना खुद का दिमाग लगाने से।

 मैं शास्त्र में कही हुई इन बातों को किस तरह अपनी समझ से समझती हूँ, यहाँ मैं इसका एक उदाहरण देती हूँ।

१-  अब जैसे बल की ही बात से शुरू कर लेते हैं। जैसे इसमें प्रथम पांच तो इंद्रिय का बल बताया गया है। देखने की, सुनने की, सूंघने की, स्पर्श की- ये सारे बल मनुष्यों के पास जन्म से ही होते हैं।कईयों के पास नहीं भी होते ।

दारासिंह जी मशहूर पहलवान हुए हैं। उन्होंने अपनी जीवनी लिखी है। क्यों लिखी?  इस बात को समझाते हुए वे कहते हैं की मैंने जीवनी इसलिए लिखी क्योंकि मैं यह बताना चाहता था कि जिस व्यक्ति के पास हाथ की 10 उंगलियां और पैर के 10 उँगलियाँ हैं, तो उसे घबराना नहीं चाहिए और जीवन में कोई भी चीज़ उसके लिए अप्राप्त नहीं है। 

 यह बात मुझे बड़ी शानदार लगी। वे इसमें मनुष्य के साहस का महत्त्व बताना चाहते थे । कि किसी भी परिस्थिति में इंसान को घबराना नहीं चाहिए।

 दारासिंह की इस बात को मैंने प्रथम पांच इंद्रिय बल से कनेक्ट किया। थोड़ा बहुत टेक्निकली शब्दों का फर्क है। दारासिंह जी जैन नही थे । उन्होंने जैनागम नहीं पढ़े थे ।बट शायद बात वे वही कहना चाह रहे थे।

इस तरह से जैन आगम दुनिया को समझने मे बेस का काम करते हैं ।

शक्ति 

-----

प्रश्न व्याकरण सूत्र मे अहिंसा के 60 नामों मे एक नाम शक्ति है ।

आत्मा के आठ गुणों में - अनंत ज्ञान ,अनंत दर्शन ,अनंत सुख ,क्षायिक समकित , अमूर्तिक , अटल अवगाहना , अगुरु लघु , अनंत शक्ति अथवा वीर्य ।

2 किरण बिर सेठी एक स्कूल चलाती हैं । अहमदाबाद में । उनके जीवन का मंत्र है - I can . इस मंत्र को उन्होंने बच्चों की प्रेरक शक्ति के रूप  में ढाल दिया है । एटसेटरा।

 How I see her work , as , she is becoming instrumental in realizing enormous capacity (अनंत  शक्ति) of kids by introducing them to various activities.   

 This is how I try to learn things in my own humble capacity.😊

बल का उल्लेख आचारांग सूत्र में भी आया है -एक अलग कॉन्टेस्ट में । वह फिर कभी ।

...... 

आम जीवन में हम बल को इस तरह  समझते हैं जैसे ipl etc , blockbuster film, winning election . Bcoz they move great energy .create roar .

   # जैसा मैने समझा है  

.....

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें